
CSPDCL Prepaid Billing: सरकारी कार्यालयों में एक अगस्त से प्री-पेड बिजली व्यवस्था प्रारंभ हो गई है। विभागों को अब पहले रिचार्ज करना होगा। महासमुंद जिले में 8202 सरकारी कार्यालय हैं, जिनका पहले से करोड़ों रुपए का बकाया है। वहीं आम जनता और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्री-पेड व्यवस्था अभी शुरू नहीं हुई है।
सरकारी विभागों में प्री-पेड व्यवस्था शुरू होने से विभागों को तीन महीने का एडवांस बिजली शुल्क जमा करना होगा, इसके बाद ही बिजली सप्लाई मिलेगी। बिजली भुगतान नहीं करने पर कार्यालयों में अंधेरा छा सकता है। बताया जा रहा है कि हर विभाग को अपने कनेक्शनों का ग्रुप बनाना होगा, जिसे बिजली कंपनी एक यूनिक आईडी देगी। महीने के अंत में बैलेंस माइनस रहने पर सरचार्ज लगेगा।
वहीं दूसरी ओर 26 हजार आम उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगना शेष है। 26 हजार घरों में पुराने मीटर से ही बिजली बिल आ रहा है। शत-प्रतिशत घरों में स्मार्ट मीटर लगने के बाद ही प्री-पेड व्यवस्था शुरू करने की बात कही जा रही है। सीएसपीडीसीएल विभाग में इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। मोबाइल की तरह उपभोक्ताओं को बिजली बिल भी भुगतान करना पड़ेगा। सीएसपीडीसीएल के कार्यपालन यंत्री पीआर वर्मा ने बताया कि आम उपभोक्ताओं के लिए अभी प्री-पेड शुरू नहीं हुआ है। सरकारी विभाग के लिए ही एक अगस्त से लागू होगा।
स्मार्ट मीटर लगाने कार्य जारी है। इधर स्मार्ट मीटर से भारी भरकम बिजली बिल आ रहा है, जिसके कारण लोगों की जेब ढीली हो रही है। लोगों के घरों में मई, जून माह का भारी भरकम बिजली बिल पहुंचा है। लोग बिजली कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर के विरोध में अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
जिले में स्मार्ट मीटर लगाने की रफ्तार सुस्त गति से चल रही है। डेढ़ साल में लगभग 75 प्रतिशत स्मार्ट मीटर घरों में लग पाए हैं। 25 प्रतिशत घरों में अब तक स्मार्ट मीटर नहीं लग पाया है। इसके कारण न ही प्री पेड व्यवस्था शुरू हो पाई है। बिजली विभाग और ठेका कंपनियों के धीमी गति से कार्य पर अब सवाल उठ रहे हैं। जिले में 2 लाख 18 हजार 492 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक कल एक लाख 92 हजार 242 स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। महासमुंद जोन अंतर्गत गरियाबंद जिला भी आता है। इसे भी शामिल कर लिया जाए तो कुल 3 लाख 13 हजार 565 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है और दो लाख 70 हजार 163 स्मार्ट मीटर लगे है। इस तरह 75 फीसदी स्मार्ट मीटर अब तक लगे हैं। 25 प्रतिशत शेष है।
बिजली विभाग में ग्राम पंचायतो का सबसे ज्यादा बिजली बिल बकाया है। जिसका लंबे समय से भुगतान नहीं रहा है। इसके अलावा नगरीय निकाय का बकाया है। बकाया प्रतिवर्ष लगातार बढ़ते जा रहा है। प्री-पेड बिजली बिल व्यवस्था (CSPDCL) से नियमित रूप से बिजली बिल भुगतान होने की उम्मीद जगेगी। स्वास्थ्य विभाग, रेलवे आदि का बिल भी बकाया है।