
Chhattisgarh Monsoon 2026: दिनभर की चुभती गर्मी और बेचैन कर देने वाली उमस के बाद सोमवार दोपहर आसमान ने अचानक करवट ली। काले बादलों के साथ चली तेज हवाओं के बीच महासमुंद में आधे घंटे तक झमाझम बारिश हुई और लोगों को राहत की सांस मिली।
बस्तर में मानसून की एंट्री के साथ मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। तापमान में 4-5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन खेती-किसानी और सूखते जलस्रोतों की प्यास बुझाने के लिए अभी लगातार और अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon 2026) की दस्तक का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को महासमुंद में मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से ही तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान कर रखा था। दोपहर बाद आसमान में बादल घिरने लगे और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। करीब आधे घंटे तक हुई बारिश से शहर की सड़कों पर पानी बहने लगा और वातावरण में ठंडक घुल गई।
बारिश के बाद तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि पहली जोरदार बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की कमजोरियां भी उजागर कर दीं। बीटीआई रोड, तुमगांव रोड समेत कई इलाकों में पानी भर गया। जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले पांच दिनों तक जिले में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
जिले के किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अधिकांश किसानों ने खाद, बीज और खेतों की तैयारी पहले ही पूरी कर ली है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की बोआई शुरू नहीं हो पाई है। धान की रोपाई और बोआई के लिए लगातार और पर्याप्त बारिश जरूरी है।
बारिश में हुई देरी के कारण खेती-किसानी पिछड़ गई हैं। अब किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। यदि अगले एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश होती है तो जिले में धान की बोआई तेजी से शुरू हो जाएगी और कृषि सीजन पटरी पर लौट सकेगा। अभी खेती शुरू करने के लिए किसानों को अच्छी बारिश की आस है।
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले 48 घंटों के भीतर छत्तीसगढ़ के और क्षेत्रों में आगे बढऩे के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। राजस्थान से उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैली मौसमी द्रोणिका तथा दक्षिण भारत की सक्रिय मौसम प्रणालियां प्रदेश में नमी बढ़ा रही हैं। इसके प्रभाव से कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं तो इस सप्ताह के भीतर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय हो सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आएगी।
मानसून की देरी का सबसे ज्यादा असर जिले के जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है। अधिकांश तालाबों में पानी नाममात्र का बचा है, जबकि 50 से अधिक छोटे बांध लगभग सूख चुके हैं। बड़े बांधों में भी जलस्तर लगातार घट रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। यदि जून के अंतिम सप्ताह तक अच्छी बारिश नहीं होती है तो जलस्रोतों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। उम्मीद की जा रही कि मानसून के सक्रिय होते ही बांधों और तालाबों में पानी की आवक शुरू होगी।