
मेरठ। मेरठ जिले में अब एक नहीं तीन सांसद हैं। सांसद राजेन्द्र अग्रवाल मेरठ का प्रतिनिधित्व लोकसभा में कर रहे हैं। शुक्रवार को हुए राज्यसभा चुनाव में विजयी हुए भाजपा के सांसदों में दो सांसद मेरठ से हैं इनमें एक कांता कर्दम और दूसरे विजय पाल सिंह तोमर है। भाजपा ने पश्चिम से इन दोनों राज्यसभा भेजकर दलित और किसानों को साधने की कोशिश की है। कांता कर्दम भाजपा का दलित चेहरा हैं तो विजय पाल सिंह तोमर किसानों की राजनीति से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वे ठाकुर बिरादरी से भी ताल्लुक रखते हैं। कांता कर्दम को भाजपा ने राज्यसभा भेजकर महिला और दलित राजनीति को साधा है। लोक सभा चुनाव 2018 में इसका कितना फायदा मिलेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन भाजपा ने मायावती समेत कइयों को जवाब देने की तैयारी जरूर कर ली है।
यह दमखम है दोनों सांसदों में
कांता कर्दम इससे पहले निगम चुनाव में भाजपा से ही मेयर का चुनाव लड़ चुकी हैं और वह बसपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा से चुनाव हार गई थी। चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार को लेकर संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर भी बसपा प्रत्याशी के लिए भीतरखाने काम करने के आरोप लगे थे। पश्चिम उप्र में भाजपा के पास दलितों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई दमदार चेहरा नहीं था। कांता कर्दम को दलितों खासकर अनुसूचित जाति के बीच पैठ बनाने और महिला कोटा पूरा करने के उद्देश्य से मैदान में उतारा। भाजपा का किसान चेहरा विजय पाल तोमर चौधरी चरण सिंह के साथ ही राजनीति में उतरे थे। 1998 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में उनकी गिनती किसानों की राजनीति के पुरोधा और तेजतर्रार नेताओं में होती है। साथ ही भाजपा ने विजय पाल तोमर के जरिए ठाकुर वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी की है।
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आवास पर मनाया जश्न
कांता कर्दम और विजय पाल सिंह तोमर के राज्यसभा सांसद बनने की घोषणा के साथ ही दोनों नवनिर्वाचित सांसदों के आवास पर समर्थकों की भीड जमा हो गई। समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी की और मिठाइयां खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। मेयर का चुनाव हारने के बाद जहां कांता कर्दम के आवास पर सन्नाटा हुआ करता था। राज्य सभा की इस जीत ने उनके समर्थकों के चेहरे पर खुशी ला दी।