Meerut Weather update Today आज दशहरा के दिन मौसम ने एक बार फिर पलटी मारी है। हालांकि आज सुबह की शुरूआत धूप और आसमान में हल्के बादलों के बीच हुई है। लेकिन उमस और हवा नहीं चलते ने तापमान में बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं आज मेरठ और आसपास के जिलों में बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। आज दशहरे पर बारिश की संभावना के चलते मेला आयोजकों की चिंता बढ़ रही है। शाम के समय मेला आयोजन होना है। ऐसे में अगर बारिश आती है तो पूरा कार्यक्रम धरा रह जाएगा।

Meerut weather update Today पश्चिमी उप्र का मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। आज बुधवार की रात से बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं। यानी दशहरे वाले दिन भी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने दशहरे से मेरठ और आसपास के जिलों का मौसम बदलने की चेतावनी दी है। बुधवार की शुरूआत तेज धूप के साथ हुई। मौसम विभाग ने बुधवार से मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं। जिससे एक बार फिर बरसात दशहरे के पहले मौसम में बदलाव के आसार बन रहे हैं।
मौसम विभाग ने आज दशहरे वाले दिन यानी पांच अक्टूबर को बादल छाए रहने और बूंदाबांदी की संभावना जताई है। छह और सात अक्टूबर को मध्यम बरसात की संभावना है। ऐसे में दशहरा त्योहार रावण दहन के आयोजकों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। भैसाली, दिल्ली रोड स्थित रामलीला मैदान और बाबा मनोहर नाथ मंदिर सूरजकुंड में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। इस दौरान यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है।
बता दें कि तापमान अब समान्य से एक डिग्री अधिक हो गया है। यानी इस समय तापमान 34.1 डिग्री पर पहुंच गया है। दिन में धूल भरी हवाएं चलने की संभावना है। अपेक्षा कृत कम बारिश वाले महीने में मानसून की वापसी 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है। मानसून सीजन में इस बार सितंबर में सामान्य की तुलना में लगभग दो गुना बारिश हुई है। इस बारिश का धान की फसल को नुकसान हुआ। वहीं कई जगहों पर गन्ने की फसल गिर गई।
इस बार सितंबर माह में 245 मिलीमीटर बारिश हुई। जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 130 मिलीमीटर होता है। अगस्त माह में सामान्य रूप से 202 मिलीमीटर बरसात होती है। जबकि उसमें केवल 37 मिलीमीटर बारिश ही रिकार्ड की गई। अक्टूबर में मेरठ में सामान्य बरसात का आंकड़ा 23 मिलीमीटर है। माना जा रहा है आगामी छह और सात अक्टूबर को इस औसत की बारिश होगी।
कृषि प्रणाली संस्थान के प्रधान कृषि विज्ञानी डा. एन सुभाष ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना है। बारिश का दौर लंबा चल सकता है। इसकी तीव्रता भी अलग भागों में अलग होगी।