प्रशासनिक अफसरों को चेतावनी दी, तब तक टंकी से नहीं उतरेंगी
मेरठ। इन महिलाआें के पानी की टंक पर चढ़े ५० घंटे बीत चुके हैं, लेकिन कोर्इ भी अफसर इनकी सुध लेने नहीं आया। दरअसल, ये महिलाएं किसान परिवारों से हैं। इनमें अपनी मांग पूरी नहीं करने को लेकर इतना आक्राेश है कि चार साल से मेरठ के शताब्दी नगर में चल रहे धरने से आक्रोशित दो दिन पहले किसान आैर इनके परिवार की महिलाएं पानी की टंकी पर चढ़ गर्इ। शुरू में तो जरूर हड़कंप मच गया था, लेकिन इन महिलाआें को अब ५० घंटे हो गए हैं, लेकिन इनकी मांग को मानने या आश्वासन देने के लिए कोर्इ अफसर नहीं पहुंच रहा।
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यह है पूरा मामला
शताब्दी नगर के आसपास के गांव के सैकड़ों किसान नर्इ भूमि अधिग्रण के तहत बढ़ा हुआ मुआवजा मांग रहे है। शताब्दीनगर योजना के अंतर्गत आने वाले किसान नर्इ भूमि अधिग्रहण निति के तहत मुआवजा देने की मांग को लेकर शनिवार को पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। मेरठ में शताब्दीनगर योजना के तहत मेरठ विकास प्राधिकरण ने सैकड़ों किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था, लेकिन अपनी जमीन के निर्धारित मुआवजे को लेकर किसान संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है की नई भूमि अधिग्रहण निति के तहत उन्हें बढ़े हुए प्रतिकर के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए। करीब चार साल से किसान यहां शताब्दीनगर में धरना दे रहे हैं, इस दौरान 22 किसाानों की तो मौत भी हो चुकी है। प्रशासन की अनदेखी को देखते हुए दर्ज़नों किसान शनिवार को वहां स्थित एक पानी की टंकी पर चढ़ गए, इनमें काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। किसानों को टंकी पर चढे हुए पचास घंटे से ऊपर हो गये हैं फिर भी उनकी मांगें पूरी नहीं की जा रही है। इससे पहले भी करीब पचास बार जिला प्रशासन से वार्ता हुर्इ, लेकिन विफल रही। किसानों का अब यह कहना कि वे आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती वे टंकी से नहीं उतरेंगे ।