गंगा एक्सप्रेसवे का 95% काम पूरा हो चुका है। मेरठ के बिजौली से शुरू होने वाला यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 जिलों को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से जोड़कर विकास की नई इबारत लिखेगा।
उत्तर प्रदेश के विकास को अब 'गंगा एक्सप्रेसवे' के रूप में नए पंख लगने वाले हैं। मेरठ के बिजौली से शुरू होकर प्रयागराज के संगम तक जाने वाला यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे अब उद्घाटन की दहलीज पर खड़ा है। 95 फीसदी काम पूरा होने के साथ ही यह 12 जिलों के लिए तरक्की का नया 'इकोनॉमिक कॉरिडोर' साबित होगा। जैसे ही इस पर गाड़ियां दौड़नी शुरू होंगी, मेरठ से प्रयागराज की 12 घंटे की दूरी सिमटकर महज 7 घंटे रह जाएगी। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि इन इलाकों में व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
यह एक्सप्रेसवे यूपी के 12 जिलों से होकर गुजरेगा। इसके रूट में मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और अंत में प्रयागराज शामिल हैं। खास बात यह है कि मुख्य शहरों के अलावा 518 गांवों को इस हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण इलाकों के किसानों को अपनी फसल बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी और स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
आम जनता के लिए सबसे बड़ी राहत समय की होगी। वर्तमान में खराब रास्तों और ट्रैफिक की वजह से मेरठ से प्रयागराज पहुंचने में लगभग आधा दिन (12 घंटे) लग जाता है। गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होते ही यात्री 5 घंटे पहले अपनी मंजिल पर होंगे। यह 6-लेन का चौड़ा रास्ता न केवल सफर को आरामदायक बनाएगा बल्कि गाड़ियों के मेंटेनेंस और फ्यूल के खर्च में भी बड़ी कटौती करेगा।
फिलहाल मेरठ के बिजौली में एक्सप्रेसवे के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर अंतिम चरण का काम चल रहा है। तकनीकी टीमें टोल सिस्टम, सेफ्टी बैरियर्स और रोड क्वालिटी की बारीकी से जांच कर रही हैं। सुरक्षा कारणों से अभी आम वाहनों की एंट्री को नियंत्रित रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार से हरी झंडी मिलते ही इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा।