500 व 1000 रुपये के नोटों की 3900 गड्डियां गिनते-गिनते थक गए पुलिसवाले, तीसरी बार गिनने से की तौबा
मेरठ। जिस राजकमल एंक्लेव पर पुलिस ने शुक्रवार को छापा मारकर 25 करोड़ के पुराने नोट बरामद किए हैं, वहां पर पुलिस ने एक सप्ताह पहले से ही डेरा डाल दिया था। राजकमल एंक्लेव से बाहर निकलने वाली हर गाड़ी और हर व्यक्ति पर पुलिस के जवानों की नजर थी। सूत्रों के मुताबिक, विदेश में पुराने नोटों को बदलने का धंधा अब भी चल रहा है। जानकारी मिली है कि ये नेपाल के माध्यम से भेजे जाने थे। फिर वहां एक एनआरआई के माध्यम से इसको नई करंसी में बदलने की योजना थी।
यह है मजबूरी
उधर, पुलिस ने इस मामले में अभी तक रिपोर्ट नहीं दर्ज नहीं की है। इस बारे में एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि अभी तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। लीगल टेंडर के आधार पर तो रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है जबकि पकड़े गए नोट लीगल टेंडर नहीं हैं। ऐसे में पुलिस किस धारा में पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करे। पुलिस की मानें तो ये तो अब रद्दी है और इसे रखने पर कैसे रिपोर्ट दर्ज की जाए। बताया जा रहा है कि पुलिस अब इस मामले में विधि विशेषज्ञों से राय ले रही है।
नोट गिनते-गिनते थक गए पुलिसवाले
जानकारी के अनुसार, सौदा तय होने के बाद दिल्ली महरौली स्थित एक फार्म हाउस में ये नोटों के बोरे रखे हुए थे। जिनकों रात में कार की डिग्गी में रखकर बिल्डर संजीव मित्तल के कार्यालय पर पहुंचाया गया। राजकमल एंक्लेव में मिला काला धन गिनने के लिए दलालों नें यूं तो मशीन भी रखी हुई थी, लेकिन पुलिस को गड्डियां गिनने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी। वहां 500 व 1000 रुपये के नोटों की 3900 गड्डियां थीं। इन्हें गिनते-गिनते पुलिसवाले भी थक गए। दो बार गिनने के बाद कंफर्म करने के लिए तीसरी बार गड्डियां गिनने के लिए कहा गया तो पुलिसवालों ने तौबा कर ली। दफ्तर से नोटों की गड्डियों को कार्टूनों से निकालकर प्लास्टिक के बोरों में भरा गया था। मौके पर 25 करोड़ की रकम 21 बोरों में रखी मिली थी, जिसे पुलिस ने सील कर दिया।
बड़े राजनेता से जुड़े हो सकते हैं तार
बिल्डर के कार्यालय से बरामद हुई 25 करोड़ की पुरानी करसी के मामले में पुलिस अभी पूरी तरह से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे किसी नेता का भी हाथ हो सकता है, जिसकी पुरानी करंसी को बदलने के एवज में डीलिंग चल रही थी। जिन चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, उनमें दिल्ली निवासी नरेश अग्रवाल, ब्रज बिहार निवासी अरुण गुप्ता , परतापुर निवासी योगेश कुमार, विनोद शर्मा निवासी ब्रहमपुरी हैं। दिल्ली निवासी नरेश अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि एक एनजीओ मालिक प्रवीण महेश्वरी की एस्सार आयल कंपनी के माध्यम से इसको नई करंसी में बदलने का काम करते हैं। ये करंसी विदेश भेजी जानी थी।
पश्चिम उप्र में अब तक की सबसे बड़ी सफलता
मेरठ पुलिस के हाथ लगी 25 करोड़ रुपये की पुरानी करंसी नोटबंदी के बाद अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। इतना ही नहीं मेरठ रेंज में पकड़ी गई पुरानी करंसी की यह सबसे बड़ी खेप है। एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने बताया कि दिल्ली के एक व्यक्ति के जरिए कमीशन पर पुराने नोट बदलने का सौदा तय हुआ था। थाना कंकरखेड़ा पुलिस को इसकी जानकारी एक सप्ताह पहले चल गई थी। उसने अपने मुखबिर और पुलिसकर्मियों को राजकमल एन्क्लेव के इर्द-गिर्द तैनात कर दिया था।
बैंक की संलिप्तता से इंकार नहीं
एसपी सिटी मान सिंह चौहान का कहना है कि यह भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन नोटों के बदलने में कहीं किसी बैंक या उसके कर्मचारी की भूमिका तो नहीं है। वहीं, इनकम टैक्स विभाग के आलाधिकारियों से जब इस बारे में बात की गई ते उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पकड़े गए नोट लीगल टेंडर नहीं हैं, इसलिए उन पर उनकी तरफ से कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती। उधर, पुलिस का कहना है कि पकड़े गए लोगों से कुछ खास जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। फरार बिल्डर ही कुछ जानकारी उपलब्ध करा सकता है।