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नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत बोले- प्रतिबंध हटाने की दिशा में बिना डरे साहस के साथ आगे बढ़ें राज्य

पत्रिका कीनोट सलून में नीति आयोग ( NITI Aayog ) के सीईओ अमिताभ कांत यह लॉकडाउन ( Lockdown )का तीसरा चरण नहीं ओपनिंग का पहला चरण
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नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत बोले- प्रतिबंध हटाने की दिशा में बिना डरे साहस के साथ आगे बढ़ें राज्य
नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत बोले- प्रतिबंध हटाने की दिशा में बिना डरे साहस के साथ आगे बढ़ें राज्य

नई दिल्ली। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ( NITI Aayog CEO Amitabh ) का कहना है कि लॉकडाउन ( Lockdown )सहित विभिन्न तैयारियों के माध्यम से देश ने जानें बचाई हैं अब रोजगार और अर्थव्यवस्था ( Economy )को बचाना होगा। ऐसा नहीं किया तो लोगों की जान दूसरी वजहों से जाने लगेगी। उन्होंने राज्यों को भी कहा है कि वे बिना डरे साहस के साथ प्रतिबंध हटाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाएं।

‘पत्रिका की-नोट सलून’ मे भाग लेते हुए अमिताभ कांत ने कहा कि सोमवार से लागू हुए उपायों को ‘लॉकडाउन-3.0’ नहीं बल्कि ‘ओपनिंग 1.0’ कहना चाहिए। केंद्र सरकार ने रोजगार और अर्थव्यवस्था की चुनौती को देखते हुए ही खोले जाने की दिशा में यह कदम उठाए हैं। अब पूरे देश को हाइपर लोकलाइजेशन की रणनीति अपनानी होगी। पूरा ध्यान कंटेनमेंट जोन पर हो और अन्य इलाकों को खोला जाए।

पूरी सप्लाई चेन स्थापित हो

कांत ने कहा कि अगर पूरी सप्लाई चेन दुबारा स्थापित नहीं हुई तो अर्थव्यवस्था जल्दी उबर नहीं पाएगी। उत्पादन शुरू हो जाए और बाजार नहीं खुलें तो फिर माल बना कर क्या होगा। घरेलू बाजार के साथ निर्यात के लिए पोर्ट खोलने के भी प्रयास करने होंगे।

रोगी हों तो भी बड़े शहरों को खोलना होगा

उन्होंने कहा 80 फीसदी आर्थिक गतिविधियां कुछ प्रमुख शहरों में केंद्रित हैं। इन शहरों को पूरा बंद रखा गया तो आर्थिक गतिविधियां ठप रहेंगीं। लक्ष्य यह है कि जानें तो बचा ली हैं अब सबकी जीविका भी बचानी होगी।

नहीं खोला तो लोग ज्यादा मरेंगे

हमने अभी खोला नहीं तो तीन चीजें होंगी। लोग दूसरी बीमारियों का इलाज नहीं मिल पाने से मारे जाएंगे। कुपोषण का स्तर बहुत बढ़ जाएगा। गरीबी रेखा से निकाले गए 30 करोड़ लोगों के दुबारा अति गरीब होने का डर होगा।

बचाव के साधनों की कमी नहीं

भारत ने बड़ी संख्या में जांच करने से ले कर इलाज के लिए एक लाख बेड सुरक्षित रखने जैसे जरूरी उपाय किए हैं। वैसे भी 85 फीसदी लोगों में इसके संक्रमण के बावजूद सघन इलाज की जरूरत नहीं होगी। 15 प्रतिशत लोगों को ही भर्ती करना होगा।

डर को हराना जरूरी

1928 की मंदी के दौरान रुजवेल्ट ने कहा था डरने के लिए कुछ नहीं है। डर ही है जो हमें डरा रहा है। इस डर को नहीं हराया तो बीमारी तो जाएगी नहीं, अर्थव्यवस्था भी नहीं बचेगी।

चीन की जगह ले भारत

दुनिया भर में चीन का दबदबा घटेगा, वहां हमें अपना प्रयास करना होगा। भारत को मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट का हब बनाना होगा।

Updated on:
04 May 2020 08:25 pm
Published on:
04 May 2020 08:20 pm