
नई दिल्ली। भारतीय जवानों ( Indian Soldiers ) के सीमा पर जांबाजी के किस्से तो आपने सुने ही होंगे। दुश्मनों के दांत खट्टे करना हो या फिर देश की जनता की रक्षा हर मोर्चे पर भारतीय जवान हमेशा आगे रहते हैं। लेकिन कुछ मोर्चे ऐसे भी जहां भारतीय जवानों ने अपनी जांबाजी से जीत बड़ी जीत हासिल की है। ऐसे ही एक जांबाज हैं लेफ्टिनेंट कर्नल भरत पन्नू। जी हां भरत ने दुनिया मुश्किल साइकिल रेसों में से एक रेस को पूरा कर देश का गौरव बढ़ाया है।
लेफ्टिनेंट कर्नल भरत पन्नू ( colonel bharat pannu )ने इंडोर 4,000 किलोमीटर पैडल चलाकर ‘वर्चुअल’ मंच पर आयोजित हुई ‘रेस एक्रोस अमेरिका ( RAAM ) अपने नाम की। दरअसल साइकिलिंग में RAAM को मुश्किल रेस में से एक माना जाता है।
कोरोनावायरस संकट के बीच इस साल आयोजकों ने इस रेस को ‘वर्चुअली’ कराने का फैसला किया है। यही वजह है कि इस रेस के लिए पूरी दुनिया के साइकिल सवारों ने इंडोर ट्रेनर में प्रतिस्पर्धा की।
रातों को सोए बिना चलाना होती है साइकिल
दरअसल दुनिया की मुश्किल साइकिल रेसों में शुमार ‘टूर डि फ्रांस’ को जहां चरणों में आयोजित किया जाता है वहीं RAAM में साइकिल सवार को अपने सोने के समय को भी छोड़कर निर्धारित समय में रेस पूरी करनी होती है। यानी सोए बिना साइकिल चलाते रहना पड़ती है।
अमरीका में होनी वाली रेस में यह कई जगहों पर होती है, जिसमें रेगिस्तान की गर्मी, पहाड़ी दर्रों की सर्दी और तेज हवाओं में साइकिल चलानी होती है।
वर्चुअल रेस में यह सब नहीं था, लेकिन अन्य चुनौतियां शामिल थीं जिसमें इंडोर में काफी लंबे समय तक साइकिल चलाने के अनुभव की कमी होना भी कई प्रतिस्पर्धियों के लिये मुश्किल रहा।
12 दिन में पूरी की रेस
कर्नल पन्नू ने रविवार की शाम को 12 दिन के बाद यह रेस पूरी की। रेस पूरी करने के बाद पन्नू ने बताया कि 12 दिन तक बहुत कम सो पाया और अब सामान्य लोगों की तरह अपनी नींद लेना चाहता हूं।
इंडोर रेस में थी ज्यादा चुनौती
पन्नू ने पुणे से बेंगलुरू में अपने सेना विमानन विंग बेस पर लौटते हुए कहा, ‘आउटडोर में, आप सीट से उतरकर अपने शरीर को मोड़ लेते हो, लेकिन इंडोर में इस तरह की कोई सुविधा मौजूद नहीं थी, क्योंकि साइकिल फ्रेम स्टैंड पर चिपका हुआ है।’