भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की अनंत यात्रा का जो नहीं बन पाया गवाह, ऐसे चाहने वालों के लिए अब भाजपा करने जा रही है ये काम...
नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद देशभर से उनके चाहने वाले उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अटल के पार्थिव शरीर के साथ पैदल चलकर उनके अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। लेकिन इस ऐतिहासिक लम्हे पर कई ऐसे उनके चाहने वाले थे जो उनके अंतिम दर्शन करने नहीं पहुंच पाए। ऐसे में वाजपेयी के पंचतत्व में विलीन होने के बाद देश भर के कार्यकर्ता अपने इस जननायक की अस्थियों के अंतिम दर्शन कर सकें इस पर भी विचार किया जा रहा है।
पाकिस्तान पहुंचकर सिद्धू को याद आए अपने आदर्श, बोले-अटल भी दोनों देशों के बीच चाहते थे अमन
बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ नेता ही नहीं थे बल्कि वे कार्यकर्ताओं और जनता के बीच लोकप्रिय थे। ऐसे में पार्टी के नेताओं को लग रहा है कि हजारों की तादाद में ऐसे लोग हैं, जो अंतिम दर्शन नहीं कर सके। ऐसे में पार्टी यह फैसला ले सकती है कि उनकी अस्थियों के अंतिम दर्शन की व्यवस्था की जाए। इसके लिए यह भी तय किया जा सकता है कि उनकी अस्थियों को अलग-अलग राज्यों में लेकर जाया जाए ताकि वहां के जो कार्यकर्ता और जनता दिल्ली पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि नहीं दे सके वह वहीं पर अपने नेता के अंतिम दर्शन भी कर सके और उन्हें श्रद्धांजलि भी दे सके।
हालांकि अभी इस पर अभी फाइनल फैसला नहीं हुआ है लेकिन पार्टी में यह राय है कि देश के विभिन्न भागों से जो कार्यकर्ता दिल्ली नहीं पहुंच सके, उन्हें अपने इस नेता की अस्थियों के दर्शन का मौका दिया जाए। उम्मीद की जा रही है कि इस बारे में पार्टी अगले एक दो दिन में निर्णय ले लेगी।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि यूपी की सभी नदियों में उनकी अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा। लेकिन पार्टी में यह राय बन रही है कि वाजपेयी की अस्थियों को विसर्जन से पहले सभी क्षेत्रों में सम्मान के साथ लेकर जाया जाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस बारे में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ही करेंगे।
आपको बता दें अटल बिहार वाजपेयी को अंतिम विदाई देने के लिए इस कदर लोग सड़कों पर उतरे। लोगों ने खुद ही उनकी अंतिम यात्रा पर फूल बरसाए। इससे पता चलता है कि वाजपेयी कितने लोकप्रिय थे। पार्टी नेताओं का मानना है कि वाजपेयी ऐसे पहले नेता हैं, जिन्हें अंतिम विदाई देने के लिए प्रधानमंत्री शवयात्रा में पांच से छह किमी तक पैदल चले