अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इसे संवेदनशील मसला करार देते हुए कहा कि वे सिर्फ संवैधानिक मुद्दों पर बहस करेंगे।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद ३५ ए के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इसे संवेदनशील मसला करार देते हुए कहा कि वे सिर्फ संवैधानिक मुद्दों पर बहस करेंगे। अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सभी हितधारकों से हो रही बातचीत की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए और फिलहाल कोई आदेश जारी नहीं करना चाहिए। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई १६ अगस्त को की जाएगी।
६ अगस्त तक कार्रवाई पूरी करे केंद्रः सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट ने सरकार से ६ अगस्त तक सारी कार्रवाई पूरी करने को कहा है। यदि तय समय तक रिपोर्ट नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट मामला संविधान पीठ को भेजे जाने पर फैसला लेगा। सुप्रीम कोर्ट भारतीय संविधान के अनुच्छेद-35ए को असंवैधानिक करार देने की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासियों को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद ३५ ए को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताई थी। कोर्ट ने मामला संविधान पीठ को भेजे जाने का समर्थन करते हुए कहा था कि तीन न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई करेगी, फिर इसे पांच न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा जाएगा।
ये हैं संविधान का अनुच्छेद ३५ ए
संविधान में इसे अनुच्छेद ३७० के हिस्से के रूप में जुड़ा है। यह जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के स्थाई नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। हालांकि देश के मूल संविधान में इसके अस्तित्व पर भी विवाद है।