देश में अगले हफ्ते शुरू हो सकती है कोरोना की तीसरी लहर! एक्सपर्ट्स ने बताया दूसरी लहर के मुकाबले कितनी होगी घातक
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर ( coronavirus Third Wave ) को लेकर लगातार खबरें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है देश में तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। अगले हफ्ते से कोरोना के नए मामलों ( Corona New Cases ) में बढ़ोतरी होना भी शुरू हो सकती है।
लेकिन यहां राहत की बात यह है कि दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर उतनी घातक नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरी लहर में सेकंड वेव के मुकाबले रोजाना एक चौथाई मामले ही सामने आएंगे। ये दावा दूसरी लहर के बारे में सटीक भविष्यवाणी करने वाले आइआइटी कानपुर के विज्ञानी मणींद्र अग्रवाल और उनकी टीम ने गणितीय मॉडल सूत्र के आधार पर किया है।
पीक पर इतने केस आ सकते हैं रोजाना
आइआइटी हैदराबाद में एम विद्यासागर की अगुवाई में शोधकर्ताओं ने जो अनुमान लगाया है, उसके मुताबिक तीसरी लहर का असर दूसरी के मुकाबले 25 फीसदी ही होगा। इसके अक्टूबर महीने में पीक पर आने की संभावना है।
इस दौराना रोजाना ज्यादा से ज्यादा 1.5 लाख तक नए मामले सामने आ सकते हैं। दरअसल दूसरी लहर के दौरान चार से पांच लाख तक रोजाना कोरोना के नए केस सामने आ रहे थे। ऐसे में तीसरी लहर के दौरान ये आंकड़ा डेढ़ लाख के आसपास रहने की उम्मीद है।
इन राज्यों से ज्यादा खतरा
एक्सपर्ट्स की मानें तो तीसरी लहर भले ही उतनी घातक नहीं होगी जितनी दूसरी थी। लेकिन देश के कुछ राज्यों के हालात स्थिति को गंभीर बना सकते हैं। इनमें केरल और महाराष्ट्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो केरल और महाराष्ट्र जैसे अधिक संक्रमण दर वाले राज्य इस पूर्वानुमान की तस्वीर को बिगाड़ भी सकते हैं।
बचाव के लिए इस बात पर जोर
तीसरी लहर से बचाव और इसे नियंत्रित रखने के लिए एक्सपर्ट्स ने वैक्सीनेशन में तेजी लाने के साथ ही उभरते हॉट स्पॉट का तुरंत पता लगाने पर जोर दिया गया है।
इसके साथ ही जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस के नए वैरिएंट पर भी निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि डेल्टा जैसा कोई नया वेरिएंट आया तो हालात बिगड़ सकते हैं। दूसरी लहर के दौरान देश में ऐसा ही हुआ था।
लापरवाही बढ़ा सकती है चिंता
कोरोना संक्रमण के फैलाव को लेकर विज्ञानियों ने लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। एक्सपर्ट्स ने वायरस कमजोर पड़ने पर लोग लापरवाही बरत रहे हैं। मास्क ना लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना करना बड़े खतरे को न्योता दे सकते हैं।
महामारी की पहली लहर का प्रभाव जल्द खत्म होने के बाद कुछ ऐसा ही रवैया देखा गया था। उसके बाद दूसरी लहर ने ऐसी तबाही मचाई की किसी को संभलने का मौका ही नहीं दिया।