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एलजी बनाम सीएम विवाद: केंद्र और दिल्ली सरकार के लिए कैसे बना प्रतिष्ठा का प्रश्न !

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में सबसे अहम स्थान रखती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनी हुई मंत्रीपरिषद के पास ही फैसले लेने का अधिकार है।
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में सबसे अहम स्थान रखती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनी हुई मंत्रीपरिषद के पास ही फैसले लेने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हर मामले में एलजी की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को अपने फैसलों की जानकारी एलजी को देनी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि एलजी भी किसी भी फाइल को अपने पास लंबित नहीं रख सकेंगे। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि दिल्ली की बॉस चुनी हुई सरकार है न कि एलजी। बता दें कि दिल्ली सरकार बनाम उप राज्यपाल के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाएं दाखिल हुई थीं।

उलझा है दिल्ली में सत्ता का पेंच

दिल्ली में सत्ता का प्रमुख कौन होगा, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाएं दाख़िल हुई थीं। 5 जजों का संविधान पीठ ने डिसेम्बर में इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। इससे पहले हाइकोर्ट ने एलजी को प्रशासनिक प्रमुख कहा था।

दिल्ली सरकार की दलील

अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था कि एलजी संविधान का मज़ाक बना रहे हैं। दिल्ली सरकार का आरोप था कि एलजी असंवैधानिक तरीक़े से काम कर रहे हैं। कानूनी रूप से एलजी के पास कोई शक्ति नहीं है। एलजी किसी भी फाइल को राष्ट्रपति के पास नहीं भेजते बल्कि खुद ही फैसला लेते हैं। कौन सा प्रशसनिक अधिकारी किस विभाग में काम करेगा, इसका फैसला भी एलजी ही लेते हैं। सरकार के अधीनस्थ जो नियुक्तियां होनी हैं उनको भी एलजी ही देखते हैं। सरकार की दलील थी कि ऑफिसर एलजी की सुनते हैं और हर छोटे काम के लिए सरकार की मंत्रियों को सचिवालय और राज निवास के चक्कर काटने पड़ते हैं।

केंद्र सरकार की दलील

दिल्ली सरकार के दावों के उलट केंद्र सरकार का कहना था कि दिल्ली में सारे प्रशासनिक अधिकार एलजी के पास हैं। दिल्ली सरकार महज प्रशासन को नियमित करने के लिए हैं। यदि दिल्ली सरकार को अधिकार दिए गए तो अराजकता फैलेगी। केंद्र का कहना था कि दिल्ली देश की राजधानी है इसलिए पूरे देश के लोगों की है। इसलिए दिल्ली में जितनी भी सरकारी सेवाएं हैं, वह केंद्र के अधीन हैं। अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग का अधिकार भी केंद्र के पास है। दिल्ली का प्रशासक होने के कारण एलजी दिल्ली मंत्रिपरिषद की सलाह मानने को बाध्य नहीं है। इसलिए चुनी हुई सरकार सभी मुद्दों पर एलजी की सलाह से काम करना चाहिए।

Updated on:
04 Jul 2018 01:12 pm
Published on:
04 Jul 2018 01:09 pm
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