अमरीकी संसद ने पकिस्तान को बड़ी राहत देते हुए एक ऐसा विधेयक पारित किया है जिसके अनुसार अब पाकिस्तान को अमरीकी सहायता पाने के लिए आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने जैसी कोई पूर्व शर्त नहीं है।
लाहौर। पाकिस्तान में नई सरकार बनते ही उसके लिए एक अच्छी खबर आई है। अमरीकी संसद ने पकिस्तान को बड़ी राहत देते हुए एक ऐसा विधेयक पारित किया है जिसके अनुसार अब पाकिस्तान को अमरीकी सहायता पाने के लिए आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने जैसी कोई पूर्व शर्त नहीं है। हालांकि बुधवार को पारित इस विधेयक में पाकिस्तान को मिलने वाली सहायता राशि घटाकर 15 करोड़ डॉलर कर दी गई है, लेकिन एक बड़ी राहत देते हुए अमरीका ने पाकिस्तान से हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ कार्रवाई की पूर्व शर्त हटा ली है।
पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत
अमरीकी कांग्रेस के सीनेट ने वित्त वर्ष 2019 के लिए नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन एक्ट को 10 मतों के मुकाबले 87 मतों से पारित कर दिया। इससे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने विधेयक पर पिछले सप्ताह ही मुहर लगा दी थी। अब राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह ऐक्ट कानून बन जाएगा। इस विधेयक में पाकिस्तान को मिलने वाली सहायता राशि घटाकर 15 करोड़ डॉलर कर दी गई है। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में स्वीकृत 70 करोड़ डॉलर के मुकाबले यह रकम काफी कम है, लेकिन पाकिस्तान को आतंकी नेटवर्कों पर कार्यवाही के सबूत देने से छूट मिल गई है। अब पाकिस्तान को हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के वीडियो सबूत दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आतंकियों की बल्ले-बल्ले
माना जा रहा है कि ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद अमरीका आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर पाकिस्तान पर दबाव नहीं बना सकेगा। बता दें कि पाकिस्तान पर आरोप लगते रहे हैं वह मदद के रूप में मिले पैसे का दुरुपयोग करता है। इसको लेकर ही अमरीका सहित दुनिया के तमाम देशों ने उसकी मदद बंद कर दी। अमरीका पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देने वाला सबसे बड़ा देश रहा है।गौरतलब है कि हाल में ही ट्रंप प्रशासन ने आईएमएफ से पाकिस्तान की नई सरकार को राहत देने की अपील की थी। बता दें कि पाकिस्तान ने आईएमएफ से 12 अरब डालर का ऋण मांगा है।