अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद तालिबान एक बार फिर से अपना कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। वहीं अफगान फोर्सेज के जवान तालिबान को मुंह तोड़ जवाब दे रहे है।
नई दिल्ली। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद तालिबान एक बार फिर से अपना कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। वहीं इस कोशिश को नाकाम करने के लिए अफगान फोर्सेज के जवान तालिबान को मुंह तोड़ जवाब दे रहे है। दक्षिणी और पश्चिमी अफगानिस्तान में तीन प्रांतों के लिए तालिबान और अफगान सेना के बीच भीषण जंग चल रही है। तालिबान देश के तीन बड़े शहरों पर कब्जा करना चाहता है। पाकिस्तान से आए जिहादी आतंकी उसकी इस काम में मदद कर रहे हैं। तालिबान को उसके नापाक मंसूबे को विफल करने के लिए अफगानिस्तान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बल (ANDSF) के जवान बड़ी संख्या में तैनात किए गए है।
300 तालिबानी आतंकी मार गिराए
एक रिपोर्ट के अनुसार, अफगान सेना ने तालिबान के पिछले 24 घंटों में करीब 300 लड़ाके को मार गिराया है और 100 के करीब घायल हो गए है। ANDSF ने गजनी, कंधार, हेरात, फराह, जोज्जान, बल्ख, समांगन, हेलमंद, तखर, कुंदुज, बगलान, काबुल और कपिसा प्रांत में ये ऑपरेशन चलाए है। तालिबान से जुड़े आतंकियों को मारने के साथ-साथ फोर्स ने 13 IED भी बरामद करके डिफ्यूज किए है।
ज्यादातर शहरों में विमानों की उड़ान पर रोक
हेलमंद प्रांत के लश्कर गाह के बाद तालिबान अब कंधार को अपना निशाना बना रहे है। वहां पर विमानों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। पिछले दिन तालिबान ने कंधार एयरपोर्ट पर रॉकेट हमला किया था। इस हमले के बाद देश के ज्यादातर शहरों में अब विमानों के उड़ान को रोक लगा दी गई है।
223 जिलों पर तालिबान का कब्जा
सीएनएन के मुताबिक तालिबान ने अफगानिस्तान के अब तक करीब 223 जिलों पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा 116 जिलों में उसकी अफगान सेना से कब्जे को लेकर जंग जारी है। तालिबान के बढ़ते कदमों से देश में जबरदस्त खतरे और तनाव का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि न तो तालिबान हम पर दया दिखाएंगे और न ही अफगान सरकार बमबारी बंद करेगी। करीब दो लाख की आबादी के लोग हर वक्त मौत के साय में जी रहे है।
तालिबान सत्ता को नहीं मिलेगी मान्यता : यूरोपीय संघ
अफगानिस्तान में जहां तालिबान और अफगान सेना के बीच भीषण जंग जारी है वहीं तालिबान नेताओं के चीन से रिश्ते बढ़ाने के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) ने अपनी चिंता जाहिर करते सख्त रुख अपना रहा है। ईयू ने कहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता मिल जाती है तो उसे मान्यता नहीं दी जाएगी।