
Leopard Search Operation: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तेंदुए की दहशत के बीच वन विभाग का 24 घंटे का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना के बाद वन विभाग की कई टीमें जंगल, गन्ने के खेतों, नदी के आसपास और आबादी से सटे इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए इलाके में तीन ट्रैप पिंजरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही थर्मल ड्रोन और ट्रैप कैमरों की मदद से उसके मूवमेंट का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए अलग-अलग संभावित स्थानों पर तीन ट्रैप केज लगाए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, तेंदुए की गतिविधियों और संभावित रास्तों को देखते हुए पिंजरों की लोकेशन में बदलाव भी किया गया है। टीमों का मानना है कि तेंदुआ जिस क्षेत्र में लगातार आवाजाही कर रहा है, उसके आसपास पिंजरों की स्थिति बदलने से उसे पकड़ने की संभावना बढ़ सकती है। वन विभाग की टीमें लगातार ताजा मूवमेंट और दूसरे संकेतों की तलाश में जुटी हैं।
तेंदुए को ट्रैक करने के लिए वन विभाग थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। DFO मुरादाबाद विनय कुमार के मुताबिक, थर्मल तकनीक कम रोशनी और रात के समय किसी जानवर की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करती है। इससे उन स्थानों की निगरानी आसान हो रही है जहां सामान्य कैमरों या आंखों से तेंदुए को देखना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर लगाए गए ट्रैप कैमरों से भी लगातार गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने पिछली रात भी संभावित इलाकों में अभियान चलाया। टीमों को संभावित मूवमेंट वाले स्थानों पर तैनात रखा गया था और तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज करने की तैयारी भी की गई थी। हालांकि, रात के दौरान तेंदुए की ऐसी स्पष्ट गतिविधि सामने नहीं आई, जिससे उसे सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज किया जा सके। इसके बाद टीमों ने दिन और रात दोनों समय निगरानी जारी रखी है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दिन के समय तेंदुए की गतिविधि ज्यादा दिखाई नहीं दी। हालांकि, नदी के आसपास एक बार उसके मूवमेंट के संकेत मिलने के बाद टीमों ने इस क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया। नदी, झाड़ियों, खेतों और आबादी से जुड़े रास्तों को संभावित मूवमेंट जोन मानकर निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि तेंदुआ एक जगह रुकने के बजाय लगातार अपना स्थान बदल रहा है।
वन विभाग के अनुसार, तेंदुआ करीब 5 से 8 किलोमीटर के दायरे में घूम रहा हो सकता है। यही वजह है कि एक ही स्थान पर निगरानी करने के बजाय सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ाया गया है। खेतों, जंगल, नदी किनारे और आबादी के आसपास संभावित रास्तों को चिह्नित कर टीमों को तैनात किया गया है। तेंदुए के मूवमेंट की पुष्टि होते ही संबंधित टीम को मौके पर भेजने की तैयारी रखी जा रही है।
अभियान को व्यापक बनाने के लिए आसपास के वन विभागीय क्षेत्रों से भी सहयोग लिया जा रहा है। रामपुर, बिजनौर और अन्य वन प्रभागों से स्टाफ तथा जरूरी संसाधन मांगे गए हैं। अलग-अलग टीमों के सहयोग से बड़े क्षेत्र में एक साथ निगरानी करना आसान हो रहा है। वन विभाग का उद्देश्य तेंदुए की लोकेशन का जल्द पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ना है।
तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के लिए Wildlife SOS आगरा की टीम भी वन विभाग के साथ अभियान में सहयोग कर रही है। विशेषज्ञ टीम तेंदुए के व्यवहार और संभावित मूवमेंट को समझने में मदद कर रही है। वन विभाग और विशेषज्ञों की संयुक्त कोशिश है कि तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाए। इसके लिए मौके पर उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्रामीणों की चिंता उस समय और बढ़ गई जब तेंदुए की गतिविधियां आबादी के आसपास दिखाई देने लगीं। खेतों और घरों के नजदीक तेंदुए की मौजूदगी की आशंका के चलते लोग अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि तेंदुआ आबादी के बीच पहुंचता है तो किसी नई घटना का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से वन विभाग आबादी से जुड़े इलाकों पर भी विशेष नजर रख रहा है।
तेंदुए की दहशत का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ दिखाई दे रहा है। शाम होते ही कई लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। खेतों में काम करने वाले ग्रामीण भी अकेले जाने के बजाय समूह में जाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। अंधेरा होने के बाद खेतों और सुनसान रास्तों पर आवाजाही को लेकर ग्रामीणों में डर बना हुआ है।
वन विभाग की टीमें नदी, गन्ने के खेत, झाड़ियों, जंगल और आबादी से जुड़े रास्तों पर लगातार निगरानी कर रही हैं। तेंदुआ अगर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है तो उसके संभावित रास्तों की पहचान करने के लिए ट्रैप कैमरों और दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। टीमों के बीच लगातार समन्वय रखा जा रहा है ताकि किसी भी नए संकेत की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सके।
तेंदुए की संभावित गतिविधियों को देखते हुए तीनों ट्रैप पिंजरों की लोकेशन में बदलाव किया गया है। वन विभाग तेंदुए के मूवमेंट के पैटर्न को समझने के बाद ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दे रहा है जहां उसके पहुंचने की संभावना ज्यादा है। पिंजरों के साथ निगरानी व्यवस्था भी रखी गई है, ताकि तेंदुआ किसी संभावित ट्रैप के आसपास आता है तो टीम को समय पर जानकारी मिल सके।
वन विभाग की टीमें फिलहाल दिन और रात दोनों समय अभियान चला रही हैं। थर्मल ड्रोन, ट्रैप कैमरे, ट्रैप पिंजरे और विशेषज्ञ टीम की मदद से तेंदुए की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि तेंदुए की सही लोकेशन जल्द से जल्द सामने आए और उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सके। जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, संभावित इलाकों में निगरानी और सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।