
Maulana Issued Fatwa: बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी (Maulana Shahabuddin Razvi) ने फतवा जारी किया है। उन्होंने नए साल के जश्न को शरीयत के खिलाफ बताया।
मामले को लेकर इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशिश वारसी और सचिन बड़ा उदासीन अखाड़ा के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज और महंत सूर्यानंद मुनि ने उन पर पलटवार किया। इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशिश वारसी का कहना है, ''मौलाना शहाबुद्दीन रजवी को चर्चाओं में आए हुए कई दिन हो गए थे। यह उनकी मजबूरी है। मोहर्रम को भी ये तो नाजायज बताते हैं, ताजिए को नाजायज कहते हैं। नाजायज शब्द बोलना इन्होंने सीख लिया है।''
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कशिश वारसी ने कहा, '' दूसरों की खुशियों में शामिल होना इस्लाम सिखाता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हमारा नया साल गम-ए-हुसैन से शुरू होता है, हिंदू भाइयों का नया साल चैत्र से शुरू होता है, और हम उसे भी मनाते हैं। ईसाइयों का नया साल 1 जनवरी से शुरू होता है और हम इसे भी मनाते हैं। मैं हर मजहब के लोगों से अपील करता हूं कि हर मजहब शराब पीने से मना करता है, गुनाह और हुड़दंग से भी मना करता है। नया साल मनाइए, मोहब्बत का पैगाम दीजिए।''
कशिश वारसी ने कहा कि जो लोग बांटने की बात करते हैं, हम उनके साथ नहीं रहते हैं। शरीयत में इसको लेकर कोई जिक्र नहीं है। उनके फतवे को हम नहीं मानते हैं। उनकी सोच पर मुझे अफसोस है। उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि ऐसे लोगों से बचें।
वहीं, मामले को लेकर महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा, '' ऐसी बातों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। व्यस्त जिंदगी में कोई खुशी मनाने के लिए थोड़ा समय निकाल ले तो ये अच्छी बात है। सनातनियों का नया साल नवरात्रि से शुरू होता है। खुशियां मनाने के लिए हमने तो एक-एक दिन देवी-देवताओं के नाम पर रख दिए हैं। मौलाना और मौलवियों को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए।''
महंत सूर्यानंद मुनि ने कहा, ''यह कैलेंडर का नया साल है। यह हमारा नया साल नहीं है। इस्लाम में भी यह नया साल नहीं है। मौलाना ठीक कह रहे हैं, लेकिन उनकी बात मानता कौन है? वे तुगलकी फरमान जारी कर रहे हैं कि नाचना-गाना नहीं, इसे मानने को कोई तैयार नहीं है। 1 जनवरी को नया साल मनाने का प्रचलन है, ऋतु परिवर्तन के बाद हमारा नया साल शुरू होता है।''