मुरादाबाद

सपा नेता एसटी हसन का बयान: इंटरनेट, अश्लीलता और शराब को बताया यौन अपराधों की जड़, सख्त कानून की उठाई मांग

UP News: यूपी के मुरादाबाद में सपा नेता एसटी हसन ने बढ़ते यौन अपराधों पर चिंता जताते हुए इंटरनेट पर फैल रही अश्लीलता और शराब के नशे को इसका मुख्य कारण बताया।

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सपा नेता एसटी हसन का बयान | Image - FB/@drsthasanmoradabad

ST Hasan statement rape internet alcohol: मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने बढ़ते यौन अपराधों के लिए इंटरनेट पर फैल रही अश्लील सामग्री और शराब के नशे को मुख्य कारण बताया। एसटी हसन का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट युवाओं की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है, जिससे उनका सामाजिक और नैतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है।

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इंटरनेट की दुनिया में बढ़ती अश्लीलता पर चिंता

एसटी हसन ने कहा कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की आसान पहुंच ने युवाओं को ऐसी सामग्री तक पहुंचा दिया है, जो उनके व्यवहार और सोच पर गहरा असर डाल रही है। उन्होंने दावा किया कि लगातार अश्लीलता देखने से युवाओं की संवेदनशीलता कम हो रही है और वे भावनात्मक नियंत्रण खोने लगते हैं। उनका मानना है कि यह स्थिति समाज के लिए खतरनाक संकेत है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

हार्मोनल बदलाव और युवाओं का बिगड़ता संतुलन

अपने बयान में एसटी हसन ने युवाओं में बढ़ते हार्मोनल प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था और युवावस्था में शारीरिक बदलाव स्वाभाविक हैं, लेकिन जब इस दौर में इंटरनेट और नशे का प्रभाव जुड़ जाता है, तो स्थिति और जटिल हो जाती है। उनके अनुसार, सही मार्गदर्शन और सामाजिक नियंत्रण के अभाव में युवा गलत दिशा में भटक सकते हैं।

शराब के नशे पर टिप्पणी

एसटी हसन ने शराब के सेवन को भी अपराधों की एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि नशे की हालत में व्यक्ति अपने विवेक और आत्मसंयम पर नियंत्रण खो देता है, जिससे हिंसा और यौन अपराध जैसी घटनाएं बढ़ती हैं।

दोषियों के लिए सख्त कानून की मांग

अपने बयान के अंत में एसटी हसन ने स्पष्ट रूप से कहा कि समाज में भय और अनुशासन कायम करने के लिए अपराधियों के खिलाफ कठोर कानून बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ बयानबाजी से नहीं, बल्कि प्रभावी कानूनी कार्रवाई से ही ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सकती है। उनका मानना है कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत नहीं होगी।

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