
Abhijeet Dipke marriage proposals: नीट पेपर लीक और युवा मुद्दों को लेकर देश भर में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और प्रमुख चेहरा बने 30 साल के अभिजीत दीपके के घर इन दिनों रिश्तों की कतार लगी हुई है। हालांकि, जहां एक तरफ परिवार चाहता है कि अभिजीत इस साल के अंत तक शादी के बंधन में बंध जाएं, वहीं उनके माता-पिता का कहना है कि अंतिम फैसला खुद अभिजीत का ही होगा। फिलहाल वे चाहते हैं कि अभिजीत पहले अपने आंदोलन और देशहित के कामों को पूरा करें।
अभिजीत की बढ़ती लोकप्रियता के बीच शादी के प्रस्तावों का सिलसिला भी तेज हो गया है। अभिजीत की मां अनीता दीपके ने बताया कि अभिजीत के लिए शादी के रिश्ते CJP आंदोलन शुरू होने से पहले भी आ रहे थे और अब भी लगातार आ रहे हैं। जब वह बोस्टन (अमेरिका) में था, तब भी हमने फोन पर इस बारे में बात की थी, लेकिन वह सिर्फ मुस्कुरा दिया। एक माता-पिता के तौर पर हम चाहते हैं कि वह शादी कर ले। कुछ दिनों में जब वह घर आएगा, तो हम इस पर फिर से बात करेंगे, लेकिन अंतिम फैसला उसी का होगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और आंदोलन के समापन के बाद अभिजीत को घर लौटना था, लेकिन 'टाइफाइड' होने के कारण उनके आने में 4-5 दिनों की देरी हो गई है।
सीजेपी की स्थापना और आंदोलन के दौरान दीपके परिवार को सुरक्षा संबंधी चिंताओं का भी सामना करना पड़ा। मां अनीता दीपके ने खुलासा किया कि बोस्टन में जब अभिजीत को धमकियां मिलने लगीं कि उसके भारत में रहने वाले माता-पिता को निशाना बनाया जाएगा, तो अभिजीत ने तुरंत उन्हें घर छोड़ने की सलाह दी। परिवार करीब 15 दिनों तक कोंकण में अपने रिश्तेदारों के यहां छिपा रहा। परिवार को पार्टी बनाने की जानकारी भी टीवी न्यूज चैनलों के माध्यम से ही मिली थी, क्योंकि अभिजीत ने अपनी राजनीतिक योजनाओं को पूरी तरह गुप्त रखा था।
अभिजीत के बचपन को याद करते हुए परिवार आज भी हैरान है कि घर में बेहद शांत रहने वाला लड़का आज राष्ट्रीय टीवी पर तीन भाषाओं में बेबाकी से बोलता है। बचपन में अभिजीत घर में बहुत कम बोलता था और स्कूल में कभी वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। महामारी के दौरान अभिजीत ने अपने घर की पार्किंग में 15 बेघर आदिवासी परिवारों को शरण दी और उनके भोजन की व्यवस्था की।
सेंट अलफोंसा स्कूल से 10वीं में 96% अंक लाने वाले अभिजीत को माता-पिता के दबाव में पुणे के सिंहगढ़ संस्थान से इंजीनियरिंग करनी पड़ी, जिसे उन्होंने फाइनल एग्जाम से ठीक पहले छोड़ दिया। बाद में माता-पिता ने भी स्वीकार किया कि उस पर इंजीनियरिंग थपने का फैसला गलत था। प्रदर्शन के दौरान जब अभिजीत पर स्याही फेंकी गई और थप्पड़ मारा गया, तो परिवार काफी चिंतित हो गया था। इस पर अभिजीत ने अपनी मां को दिलासा देते हुए कहा था कि 'मां, अब चिंता मत करो, अब मैं पूरे देश की अमानत बन चुका हूं।'