महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव से पहले सत्ताधारी गठबंधन 'महायुति' के भीतर दरारें खुलकर सामने आने लगी हैं। इस बीच एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने बड़ा बयान दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय 'महायुति' के समीकरणों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो दल केंद्र और राज्य सरकार में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, वे स्थानीय नगर निगम चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ क्यों खड़े हैं? इस पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने चुप्पी तोड़ते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनके 35 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई चुनाव देखे हैं, लेकिन इस बार का नगर निगम चुनाव कुछ अलग और अनोखा है।
भले ही राज्य और केंद्र में भाजपा और अजित पवार की एनसीपी साथ हैं, लेकिन पिंपरी-चिंचवड सहित महाराष्ट्र के ज्यादातर महानगरपालिकाओं के चुनावों में दोनों दल आमने-सामने हैं। राज्य में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी।
पुणे में चुनावी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजित पवार ने कहा, "केंद्र में हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार का हिस्सा हैं और उनके नेतृत्व में देशभर में विकास तेजी से हो रहा है। महाराष्ट्र में भी भाजपा और सहयोगी दल मिलकर सरकार चला रहे हैं, जहां देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और वह खुद मिलकर काम कर रहे हैं। लेकिन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जनता एक अलग ही नजारा देख रही है। एक जागरूक मतदाता के मन में यह सवाल आना वाजिब है कि यदि हम केंद्र-राज्य में साथ हैं, तो यहां क्या गलत हुआ?"
अजित पवार ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति पहली बार पैदा नहीं हुई है। उन्होंने पिछले उदाहरण देते हुए कहा कि जब राज्य में महाविकास अघाड़ी (MVA) या कांग्रेस-NCP गठबंधन की सरकारें थीं और केंद्र में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब भी स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर स्थानीय मुद्दों पर अलग-अलग लड़े जाते थे।
उन्होंने कहा कि सुशील कुमार शिंदे, अशोक चव्हाण और विलासराव देशमुख जैसे दिग्गज नेताओं के कार्यकाल में भी स्थानीय मुद्दों पर सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते थे। अजित पवार के अनुसार, नगर निगम चुनाव स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व की साख का चुनाव होता है। आज भी वैसी ही स्थिति दिख रही है।
अजित पवार ने कहा कि आज भी केंद्र और राज्य सरकार महाराष्ट्र के हर कोने में विकास कार्यों के लिए भरपूर फंड दे रही हैं। किसी भी योजना को न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने रोका है। असली सवाल उन नगर निगमों के कामकाज पर है, जो लंबे समय से एक ही नेतृत्व के अधीन रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि इसमें केंद्र या राज्य सरकार की कोई गलती नहीं है, बल्कि असली जवाबदेही स्थानीय नेतृत्व के प्रदर्शन की है। यही मुद्दा इस बार के नगर निगम चुनाव में मतदाताओं के सामने सबसे अहम सवाल बनकर उभरा है। हमारी लड़ाई सीधे तौर पर स्थानीय नेतृत्व से है।