Mumbai Mayor Election: मुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC) में भाजपा ने भले ही बड़ी जीत दर्ज की हो, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं है।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय मुंबई की सत्ता को लेकर जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है। मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजे आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मेयर पद को लेकर बना हुआ है। भाजपा ने भले ही बड़ी जीत दर्ज की हो, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं है। लेकिन महायुति गठबंधन को बहुमत से केवल 4 सीटें ज्यादा मिलने के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने 29 नवनिर्वाचित नगरसेवकों को लग्जरी होटल में रखा है। बताया जा रहा है की शिंदे गुट ने मांग की है कि पहले एक साल के लिए मेयर का पद शिवसेना को दिया जाए, जबकि बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं है।
इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या मेयर पद के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बीच कोई गुप्त बातचीत चल रही है? कयास लगाए जा रहे हैं कि मेयर चुनाव के दौरान ठाकरे गुट के 65 नगरसेवक सदन से अनुपस्थित रह सकते हैं, जिससे भाजपा का रास्ता साफ हो जाए। अब इन अटकलों पर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है।
संजय राउत ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और सीएम फडणवीस के बीच किसी भी तरह की बातचीत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री और उद्धव जी के बीच कोई चर्चा नहीं हुई है। ये सब अखबारों और सूत्रों के हवाले से चल रही मनगढ़ंत खबरें हैं। हम ऐसी अफवाहों पर विश्वास नहीं करते।"
राउत ने तंज कसते हुए आगे कहा कि मुंबई का मेयर कौन होगा, यह अब भाजपा और गौतम अडानी तय करेंगे। उन्होंने दावा किया कि भले ही भाजपा अपनी जीत का जश्न मना रही हो, लेकिन मुंबई की जनता ने उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं दिया है।
उद्धव के करीबी सहयोगी संजय राउत ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि दिल्ली से ऐसी चालें चली जा रही हैं कि मुंबई में भाजपा और विशेष रूप से फडणवीस के पसंद का मेयर न बन पाए। उन्होंने कहा, एकनाथ शिंदे को मेयर पद के लिए दिल्ली से निर्देश मिल रहे है। मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए भाजपा गठबंधन के भीतर ही खींचतान मची हुई है।
साल 2017 के बीएमसी चुनाव में भाजपा ने अविभाजित शिवसेना का मेयर बनाने के लिए वोटिंग से पीछे हटने का फैसला किया था। सियासी गलियारों में चर्चा है कि इस बार ठाकरे गुट के 65 नगरसेवक वोटिंग के समय गैर-हाजिर रहकर भाजपा की मदद कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बृहन्मुंबई महानगरपालिका में मेयर का चुनाव निर्विरोध होगा। हालांकि, भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने स्पष्ट किया है कि ठाकरे गुट के साथ ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है। 227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है।
हाल ही में घोषित हुए बीएमसी चुनाव के नतीजों में किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। लेकिन भाजपा को सबसे ज्यादा 89 वार्डों में जीत मिली है। विपक्षी खेमे में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने 65 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी राज ठाकरे की मनसे को 6 वार्डों में सफलता मिली। वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं। वहीं ओवैसी की एआईएमआईएम ने 8, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को तीन, समाजवादी पार्टी (सपा) को दो और एनसीपी (शरद पवार गुट) को एक सीट पर जीत हासिल हुई है।
अगर सियासी गणित की बात करें तो काल्पनिक स्थिति में विपक्ष एकजुट होता है, तो उसके पास कुल 106 सीटें होंगी। यह आंकड़ा बीएमसी में बहुमत से सिर्फ 8 सीट कम है। माना जा रहा है कि इसी संभावित समीकरण को देखते हुए शिंदे गुट ने अपने शिवसेना पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई है।
शिवसेना शिंदे गुट ने होटल पॉलिटिक्स से जुड़ी अटकलों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि शिवसेना और भाजपा ने महायुति के तहत मिलकर चुनाव लड़ा है। 29 पार्षदों में से 20 पहली बार चुने गए हैं और उन्हें सदन के कामकाज, मुद्दे उठाने और महायुति में पार्टी की भूमिका के बारे में बताने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से एक कार्यशाला के लिए पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल में ठहराया गया है, जहां वरिष्ठ नेता उनका मार्गदर्शन करेंगे। शिंदे गुट ने यह भी साफ किया कि शिवसेना किसी से डरती नहीं और न ही उसे होटल की राजनीति का सहारा लेने की जरूरत है। पार्टी के निर्वाचित पार्षदों ने सीधे तौर पर उद्धव गुट के उम्मीदवारों को हराया है, टूटने का डर उन्हें है।