
Maharashtra News: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अंदर ही अंदर खींचतान शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के घर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे दो युवाओं की तबीयत बिगड़ गई। हालत खराब होने पर दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा। दोनों युवक 6 अगस्त से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे थे।
मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या CJP की नई कोर कमेटी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि इस कमेटी में आंदोलन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं और अलग-अलग राज्यों के युवाओं को उचित जगह नहीं दी गई। दोनों का कहना है कि आंदोलन में साथ देने वाले कई युवाओं को बाद में फैसले लेने वाली टीम से दूर कर दिया गया।
मनीष और राहुल का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में दूसरे युवाओं के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उस समय आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि देशभर के युवाओं की आवाज के तौर पर आगे बढ़ रहा था।
लेकिन अब उनकी शिकायत है कि संगठन की आगे की रणनीति बनाने के लिए जो बैठकें हो रही हैं, उनमें उन्हें ही शामिल नहीं किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कोर कमेटी में कुछ खास लोगों को ज्यादा महत्व दिया गया है।
दोनों युवाओं की मांग है कि CJP में फैसले सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनका कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन से जुड़े युवाओं को भी संगठन में अपनी बात रखने और निर्णय लेने का मौका मिलना चाहिए।
भूख हड़ताल के दौरान दोनों की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। मनीष ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें जबरदस्ती अस्पताल लेकर गई। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया।
दोनों के अस्पताल जाने के बाद कुछ दूसरे स्वयंसेवक भी विरोध स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल को आगे भी जारी रखा जाएगा। यानी प्रदर्शनकारियों का साफ संदेश है कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद यह मामला खत्म नहीं हुआ है।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने CJP के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें ऐसा संगठन नहीं चाहिए, जहां फैसले कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में रहें। इसी दौरान उन्होंने कहा, 'हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए।' मनीष और राहुल का कहना है कि अगर CJP का आंदोलन युवाओं से जुड़ा है तो संगठन में भी युवाओं की आवाज सुनाई देनी चाहिए।
फिलहाल इस पूरे विवाद पर अभिजीत दीपके की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सवाल यह है कि क्या CJP नेतृत्व इन युवाओं की मांगों पर बातचीत करेगा या फिर संगठन के अंदर उठ रही यह नाराजगी आगे और बढ़ेगी?