
Cockroach Janta Party: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 'स्कूल ठीक करो' राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है। अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी के जिला परिषद स्कूल का जायजा लेने पहुंचे दीपके ने वहां की बदहाली देखकर सीधे शिक्षा विभाग के अधिकारी को फोन मिला दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दो दिनों के अंदर शराब पीकर स्कूल आने वाले प्रिंसिपल को बर्खास्त नहीं किया गया, तो वे गांव वालों को साथ लेकर प्रदर्शन करेंगे।
दीपके ने शिक्षा अधिकारी को फोन पर बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल शराब पीकर आते हैं। ग्रामीणों ने इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि स्कूल में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए सिर्फ दो ही टीचर मौजूद हैं। दीपके ने अधिकारी से साफ कहा कि अगर मंगलवार तक शराबी प्रिंसिपल को नहीं हटाया गया, तो वे गांव वालों को साथ लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
अभिजीत दीपके ने पूरे ऑडिट का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर सरकारी दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद जब वे स्कूल परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे, तो वहां आजादी के 80 साल बाद भी विद्यार्थियों के लिए बने शौचालयों में पानी की बुनियादी सुविधा तक नहीं थी। इतना ही नहीं, स्कूल की टूटी हुई खिड़कियों को छिपाने के लिए प्रशासन ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तस्वीर वाले बैनर लगाए हुए थे। इसके अलावा नामांकित बच्चों की भारी संख्या के मुकाबले पूरी कक्षा में सिर्फ चार ही बेंच मौजूद थी, जिस वजह से बाकी बच्चों को जमीन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था।
दीपके ने केंद्र और राज्य सरकार पर शिक्षा बजट में कटौती करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले एक 10 सालों में देशभर में 94,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। जहां नए स्कूल खोलने की जरूरत है, वहां सरकारें इन्हें बंद कर निजी स्कूलों को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने मांग उठाई कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस पर तुरंत सीमा तय की जाए, ताकि गरीब बच्चों को भी समान अवसर मिल सकें।
'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत अब महाराष्ट्र के अन्य तालुकों और देशभर के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की एक विस्तृत सूची बनाई जाएगी। अभिजीत दीपके ने ऐलान किया कि शिक्षा के बाद उनका अगला कदम सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ होगा। उन्होंने ग्रामीणों, सरपंचों और युवाओं से अपने क्षेत्रों के स्कूलों व अस्पतालों का हिसाब-किताब मांगने की अपील की है।