
Hingoli Limbala school news: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित लिंबाला गांव से ग्रामीणों और शिक्षा सुधार अभियान के लिए एक बड़ी जीत की खबर सामने आई है। स्कूल में शराब के नशे में धुत होकर आने वाले प्रिंसिपल को प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ग्रामीणों के लंबे विरोध और 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन को यह कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी है।
बता दें कि इस कार्रवाई के बाद सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए इस जीत को पश्चिम बंगाल के पीड़ित कार्यकर्ता अब्दुल और उनके दिवंगत पिता को समर्पित किया है।
प्रिंसिपल के निलंबन की खबर सामने आने के बाद अभिजीत दीपके ने बयान जारी करते हुए लिखा कि 'हिंगोली जिले के लिंबाला गांव के लोगों की यह पहली बड़ी जीत है। शराब के नशे में रहने वाले प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है। मैं यह जीत अब्दुल और उसके पिता को समर्पित करना चाहता हूं। जैसा कि अब्दुल ने कल कहा था- 'अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे।'
लिंबाला गांव के प्राथमिक/माध्यमिक सरकारी विद्यालय में तैनात प्रिंसिपल पर लंबे समय से शराब के नशे में ड्यूटी पर आने और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने के आरोप लग रहे थे। ग्रामीणों और अभिभावकों ने कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही थी। CJP के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत जब इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया और प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाया गया, तब जाकर शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपी प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया।
अभिजीत दीपके का यह बयान हाल ही में पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा (इंदस ब्लॉक) में हुई हिंसा की पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। वहां सीजेपी कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज द्वारा प्राथमिक स्कूल की बदहाली पर आवाज उठाने पर कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके घर पर हमला कर दिया था, जिसमें उनके पिता एसके मोहम्मद माफिक की मौत हो गई थी। अब्दुल के पिता के निधन और तमाम धमकियों के बावजूद सीजेपी कार्यकर्ताओं ने देशभर के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने का अपना संकल्प जारी रखा है। हिंगोली में मिली इस सफलता को सीजेपी इसी राष्ट्रव्यापी संघर्ष का एक अहम पड़ाव मान रही है।