
Manoj Jarange on Eknath Shinde: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और महायुति सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। आंदोलन की शुरुआत से शिंदे के प्रति नरम रुख रखने वाले जरांगे ने पहली बार उन्हें सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि आप पर लगा गद्दारी का दाग मराठा समाज की वजह से ही धुला था, इसे मत भूलिए। जरांगे के इस बयान को मराठा आंदोलन और महायुति सरकार के बीच बढ़ते टकराव का संकेत माना जा रहा है।
अंतरवाली सराटी में कुनबी जाति प्रमाणपत्र अमान्य घोषित किए गए जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि उन्हें एकनाथ शिंदे से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "शिंदे साहब लगातार डबल गेम खेल रहे हैं। मराठा समाज के युवाओं ने सांसद संदिपानराव भुमरे जैसे नेताओं को जिताने के लिए दिन-रात मेहनत किया। क्या हमारे इस सहयोग का बदला आप इसी तरह देंगे? मराठों के साथ डबल गेम मत खेलिए। हमें यह कहने पर मजबूर मत कीजिए कि उद्धव ठाकरे बेहतर थे।"
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही मंत्री उदय सामंत का मनोज जरांगे को फोन आया। बातचीत के दौरान जरांगे ने कहा कि वह एकनाथ शिंदे को अपनी आंखों के तारे की तरह मानते हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मराठा समाज के साथ न्याय नहीं किया।
मनोज जरांगे ने इलाके के शिवसेना सांसद संदिपानराव भुमरे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भुमरे की जीत में मराठा समाज के युवाओं की बड़ी भूमिका थी, लेकिन अब वही नेता मराठा समाज के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर मराठा समाज के साथ अन्याय हुआ तो एकनाथ शिंदे की जितनी भी सीटें होंगी, उन्हें हम चुनाव में हराने का काम करेंगे। इतनी सीटें गिराएंगे कि उन्हें जिंदगी भर पछताना रहेगा।"
मनोज जरांगे ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंत्रालय स्तर पर एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है ताकि मराठा समाज को कुनबी प्रमाणपत्र मिलने से रोका जा सके और उन्हें सामाजिक तथा राजनीतिक रूप से अलग-थलग किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए देवेंद्र फडणवीस सरकार योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है।
मनोज जरांगे ने कहा कि वह किसी के दबाव में आने वाले नहीं हैं और जेल जाने से भी नहीं डरते। उन्होंने कहा, "अगर मराठा समाज के दम पर सत्ता में आई सरकार ही मराठों के साथ अन्याय करेगी, तो 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मराठा समाज इसका सबसे बड़ा जवाब देगा।"