मुंबई

मुस्लिम शख्स ने नाबालिग से शादी की, बच्चे का जन्म हुआ… हाईकोर्ट बोला- पॉक्सो केस रद्द नहीं करेंगे

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पति के खिलाफ दर्ज पॉक्सो केस रद्द करने की मांग को ठुकरा दिया है। आरोपी पर नाबालिग लड़की से शादी करने का आरोप है।

2 min read
Sep 30, 2025
नाबालिग से शादी पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- पॉक्सो केस रद्द नहीं होगा (Patrika Photo)

नाबालिग से शादी पर कड़ा रुख अपनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने पॉक्सो केस रद्द करने की मांग खारिज कर दी है। महाराष्ट्र के अकोला जिले में नाबालिग लड़की से शादी और उसके बाद बच्चे के जन्म के मामले में नागपुर खंडपीठ ने आरोपी युवक को राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पॉक्सो और बाल विवाह निषेध कानून के तहत दर्ज मामला रद्द नहीं किया जा सकता।

ये भी पढ़ें

जिन्ना के नाती के खिलाफ मुंबई में FIR दर्ज, जानें क्या है 30 साल पुराना मामला?

क्या है मामला?

यह मामला एक 29 वर्षीय मजदूर से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने 17 वर्षीय नाबालिग से शादी की और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जून 2024 को शादी के समय आरोपी लगभग 27 वर्ष का था। मई 2025 में इस लड़की ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद 1 जुलाई को तेल्हारा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।

आरोपी पक्ष ने अदालत से एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और परिवार की सहमति से मुस्लिम रिवाज से जून 2024 में शादी की गई थी। आरोपी के वकील ने दलील दी कि अब लड़की बालिग हो चुकी है, विवाह का पंजीकरण भी कानूनी रूप से हो चुका है और दोनों खुशहाल जीवन जी रहे हैं। ऐसे में मुकदमा चलाना उनके परिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकता है।

पीड़ित लड़की की ओर से भी वकील ने यही दलील दी कि पीड़िता अब अपने जीवन में आगे बढ़ चुकी है और FIR रद्द करना ही उचित होगा।

लेकिन सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी युवक को लड़की की उम्र की पूरी जानकारी थी और बच्चे के जन्म ने अपराध को और भी स्पष्ट कर दिया है। पॉक्सो कानून के तहत नाबालिग की सहमति का कोई महत्व नहीं है।

व्यक्तिगत मामलों के अनुरूप कानून नहीं बनाया जा सकता- HC

जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के और जस्टिस नंदेश एस देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी उस समय 27 साल का था और उसे समझना चाहिए था कि लड़की के बालिग होने तक इंतजार करना जरूरी है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि नाबालिग होने के बावजूद विवाह कराया गया और लड़की को उसके माता-पिता की वैध अभिरक्षा से दूर ले जाया गया, जो खुद एक अपराध है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केवल बच्चे का जन्म हो जाना या अब दोनों के बीच शादी हो जाना, कानून को नजरअंदाज करने का आधार नहीं हो सकता। पॉक्सो कानून का मकसद बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है और इसे व्यक्तिगत परिस्थितियों के हिसाब से ढीला नहीं किया जा सकता।

Published on:
30 Sept 2025 10:49 am
Also Read
View All

अगली खबर