
— रोहित के. तिवारी
मुंबई. राज्य में जल्द ही 36 टोल नाकों पर फास्ट टोल टैग सिस्टम लगाए जाएंगे। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड के साथ हाल ही में इस पर एमओयू साइन किए हैं। इस स्वतंत्रत हाइब्रिड लेन (कैशलेस और फास्ट टैग सिस्टम) दिसंबर से शुरू होने की उम्मीद है।यह निर्णय टोल नाकों पर लगने वाले भारी-भरकम ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए एमएसआरडीसी की ओर लिया गया है। हालांकि कार्यान्वयन शुरू करने से पहले टोल नाकों को आवश्यक सुविधाओं समेतआंतरिक मरम्मत और बुनियादी ढांचा चुस्त-दुरुस्त किया जाएगा। एमएसआरडीसी के अधिकारियों ने कहा कि एमओयू पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद इस कार्य गति दी जाएगी।
एक अलग लेन होगी स्थापित...
विदित हो कि 10-15 लाख रुपए की लागत से निर्मित होने वाले इस सिस्टम के लिए एमएसआरडीसी के अधिकारियों ने हाल ही में टोल प्लाजा ऑपरेटरों के साथ एक बैठक की, जिसमें टोल प्लाजा अपडेट का सुझाव दिया गया। साथ ही अनुरोध भी किया कि टोल प्लाजा संचालक फास्ट टैग सिस्टम स्थापित करने के लिए सहयोग करें। एमएसआरडीसी के सह-निदेशक विजय वाघमारे ने कहा कि यह तीन चरणों में किया जाएगा और पहले चरण में फास्ट टैग के लिए एक अलग लेन स्थापित की जाएगी।
हर टोल पर खर्च होंगे 25 लाख...
वर्तमान में राज्य में 36 टोल नाके हैं और 20 टोल नाके सरकारी स्वामित्व वाली हैं और 16 टोल नाके एमएसआरडीसी के अधीन हैं। फास्ट टैग सिस्टम स्थापित करने से ड्राइवर का समय बचेगा। इस प्रणाली के साथ वाहन को टोलनाका तक पहुंचने में लगने वाला समय 15-20 मिनट से घटकर सिर्फ तीन से चार मिनट राह जाएगा। फास्ट टैग को पढ़ने के लिए प्रत्येक हाइब्रिड लेन पर एंटीना और रीडर्स लगाए जाएंगे। कार्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से किया जाएगा। केंद्र सरकार ने प्रत्येक टोल के लिए कम से कम 25 लाख रुपये खर्च करने को कहा है, जिसमें से 15-20 लाख रुपये प्राथमिक कार्य पर खर्च किए जाएंगे। टोल प्लाजा मालिक मदद की अपील कर रहे हैं। इस काम के लिए 50 प्रतिशत राशि नॅशनल हायवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को दी जाएगी।