NCP Sunetra Pawar: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में एक बार फिर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार द्वारा चुनाव आयोग को भेजा गया एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की कमान संभाल रहीं सुनेत्रा पवार के एक पत्र ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। दरअसल इस पत्र में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पदों का उल्लेख नहीं होने से कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को पार्टी पदाधिकारियों की एक नई सूची भेजी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में पार्टी के दिग्गज नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नामों के आगे उनके संगठनात्मक पदों का उल्लेख नहीं किया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनेत्रा पवार ने 10 मार्च को चुनाव आयोग को अपनी नियुक्ति की जानकारी दी थी। इसके साथ उन्होंने 14 पदाधिकारियों की सूची भी भेजी। इस सूची में खुद को पार्टी अध्यक्ष और शिवाजीराव गार्जे को कोषाध्यक्ष बताया गया है।
हालांकि, इस सूची में प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल और जय पवार जैसे बड़े नेताओं के पदों का कोई जिक्र नहीं है। यही बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गई है।
साल 2023 में एनसीपी में हुए विभाजन के बाद अजित पवार को पार्टी प्रमुख बनाया गया था। जबकि प्रफुल्ल पटेल को एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष और सुनील तटकरे को महाराष्ट्र एनसीपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
इस बीच, पुणे जिले के बारामती में 28 जनवरी को हुए विमान दुर्घटना में अजित पवार की मौत हो गई। इस हादसे के बाद 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन और नेतृत्व को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
सुनेत्रा पवार बुधवार शाम दिल्ली पहुंचीं, जहां उनकी एनडीए (NDA) के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। इस मुलाकात को भी पार्टी के भविष्य और संभावित रणनीतिक फैसलों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि इस पूरे मामले पर प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और एनसीपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पिछले महीने एनसीपी (शरद पवार) नेता रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार के निधन के बाद दोनों ने एनसीपी (अजित गुट) पर कब्जा करने की कोशिश की थी।
विधायक रोहित पवार ने कहा कि 28 जनवरी को अजित पवार की मौत से ठीक 18 दिन बाद, 16 फरवरी को चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा गया था। इसका मकसद पार्टी की सारी ताकत और अधिकार, जो पहले अजित दादा के पास थे, उन्हें प्रफुल्ल पटेल को देना था। यह सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार, या पार्टी के विधायकों की जानकारी के बिना किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि नेताओं के एक ग्रुप ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी के संविधान में बदलाव करके कार्यकारी अध्यक्ष को अजित पवार के सारे अधिकार देने की मांग की थी। लेकिन इसके बाद सुनेत्रा पवार ने आयोग को पत्र लिखकर कहा कि अजित पवार की मौत के बाद से उनके अध्यक्ष पद संभालने तक मिले किसी भी पत्र को नजरअंदाज किया जाए।
इसी बीच, सुनील तटकरे के हालिया बयान ने सियासी माहौल और गरमा दिया है। लंबे समय तक दोनों गुटों के एक होने की बात से इनकार करने वाले तटकरे ने अब कहा है कि अजित पवार के जीवित रहते दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर बातचीत चल रही थी।
तटकरे ने कहा, यह हमारा फर्ज है कि हम सुनेत्रा पवार की अगुवाई में अजित दादा के सपनों वाली एनसीपी को आगे बढ़ाएं। हम यह काम पूरे पक्के इरादे के साथ करेंगे।