
Solapur MLC Election: सोलापुर विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दरअसल सोलापुर विधान परिषद चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के तीन विधायकों ने भाजपा समर्थित महायुति उम्मीदवार को खुला समर्थन देने का ऐलान किया है, जिसके बाद अब पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रहा है। एनसीपी शरद गुट के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने साफ कहा है कि पार्टी विरोधी भूमिका अपनाने वाले विधायकों के बारे में फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा।
सोलापुर विधान परिषद चुनाव में भाजपा नीत महायुति गठबंधन के उम्मीदवार राजेंद्र राउत और महाविकास आघाड़ी (MVA) समर्थित वसंतराव देशमुख के बीच सीधा मुकाबला है। इस सीट को निर्विरोध कराने के लिए प्रभारी मंत्री व भाजपा नेता जयकुमार गोरे ने खूब प्रयास किए थे, लेकिन शरद गुट के सांसद धैर्यशील मोहिते पाटील की पहल के बाद चुनावी मुकाबला खड़ा हो गया।
विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) की ओर से यह सीट कांग्रेस को दी गई थी। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद अंतिम समय में वसंतराव देशमुख को उम्मीदवार बनाया गया। उनकी उम्मीदवारी के पीछे राष्ट्रवादी (शरद पवार गुट) के सांसद धैर्यशील मोहिते पाटील की अहम भूमिका मानी जा रही है। हालांकि, इस फैसले की वजह से शरद गुट के भीतर ही आपसी मतभेद पैदा हो गए और उनके चार में से तीन विधायक छिटक कर भाजपा खेमे में शामिल हो गए।
चुनाव प्रचार के दौरान मोहिते पाटील ने 600 अदृश्य वोट होने का दावा भी किया था। हालांकि मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए वह अकेले ही दिख रहे है। इस सीट पर 18 जून को वोटिंग और 22 जून को वोटों की गिनती होगी।
विपक्षी खेमे को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब शरद पवार गुट के तीन विधायक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के नेतृत्व में हुई बैठक में शामिल हुए और महायुति उम्मीदवार राजेंद्र राउत को अपना खुला समर्थन दे दिया। इससे पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई।
एनसीपी शरद गुट के मालशिरस के विधायक उत्तम जानकर ने कहा कि विधान परिषद चुनाव में उनके साथ विश्वासघात किया गया। जानकर के अनुसार, पहले उनके बेटे जीवन जानकर को विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन अंतिम समय में मोहिते पाटील ने वसंतराव देशमुख का नाम तय कर दिया। वहीं माढा के विधायक अभिजीत पाटील ने पंचायत समिति चुनाव के दौरान हुई घटनाओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि वसंतराव देशमुख ने उस समय भाजपा की मदद की थी। अब उन्हें हमारी पार्टी ने प्रत्याशी बना दिया।
वहीं, शरद गुट के विधायक नारायण पाटील ने भी महायुति उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया है।
प्रदेशाध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा कि पार्टी के भीतर मतभेद होना अलग बात है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक रूप से व्यक्त करना या विरोधी दल के साथ जाकर समर्थन का आश्वासन देना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने सभी विधायकों को अधिकृत उम्मीदवार के साथ खड़े रहने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी विधायक के खिलाफ कार्रवाई पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। चुनाव संपन्न होने के बाद पार्टी नेतृत्व पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेगा और उसी आधार पर निर्णय लिया जाएगा।