
Thane Metro Project: ठाणे, कलवा, मुंब्रा और दिवा के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। महाराष्ट्र सरकार ने ठाणे-दिवा मेट्रो कॉरिडोर के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार ने परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने और व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराने के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने का फैसला किया है। यह निर्णय उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में मुंबई में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया।
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एजेंसी को अगले छह महीने के भीतर डीपीआर सौंपने का निर्देश दिया गया है। प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से ठाणे, कलवा, मुंब्रा, दिवा, डोंबिवली, तलोजा, कल्याण और भिवंडी के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा। साथ ही इसे कल्याण-तलोजा मेट्रो लाइन (मेट्रो-12) के मानपाडा स्टेशन से जोड़ने की भी योजना है। इससे पूरे क्षेत्र में एकीकृत मेट्रो नेटवर्क विकसित होगा।
महा मेट्रो के प्रबंध निदेशक श्रवण हार्डिकर ने बताया कि प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर का कुछ हिस्सा भूमिगत (Underground) और कुछ हिस्सा एलिवेटेड (Elevated) होगा। इससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्य आसान होगा और लोगों को कम से कम असुविधा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण अन्य मेट्रो परियोजनाओं की तुलना में अपेक्षाकृत आसान रहेगा, क्योंकि आवश्यक खुली जमीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। प्रस्तावित मेट्रो लाइन को ओल्ड ठाणे और कोलबाड क्षेत्र से गुजारने की योजना है।
महा मेट्रो ने DPR तैयार करने के लिए एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद मेट्रो का अंतिम रूट, स्टेशनों की संख्या, निर्माण लागत और समय-सीमा तय की जाएगी।
यदि परियोजना को सरकार से हरी झंडी मिलती है, तो यह ठाणे और आसपास के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
महा मेट्रो के प्रबंध निदेशक श्रवण हार्डिकर के अनुसार, वर्तमान में कलवा, मुंब्रा और दिवा के निवासी अत्यधिक भीड़भाड़ वाली उपनगरीय लोकल ट्रेनों पर निर्भर हैं। इससे रोजाना यात्रा के दौरान भारी परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीड़ कम होगी। साथ ही सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा। भीड़ के कारण होने वाली रेल दुर्घटनाओं में कमी आने की संभावना है। इससे लगभग तीन लाख से अधिक लोगों को सीधा फायदा होगा।