शिवसेना उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा, ये गद्दार हैं। जीत के 24 घंटे के भीतर ही इन्होंने अलग रास्ता चुन लिया। हम इनके खिलाफ पोस्टर लगाएंगे।
महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया, जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने चार पार्षदों के कथित तौर पर संपर्क से बाहर होने को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उद्धव गुट ने आशंका जताई है कि ये पार्षद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के 11 में से 4 नवनिर्वाचित पार्षदों के 'नॉट रिचेबल' होने के बाद उद्धव गुट ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना इन पार्षदों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है।
शिवसेना (UBT) के स्थानीय नेता शरद पाटिल ने ठाणे जिले की कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। गायब बताए जा रहे पार्षदों में मधुर म्हात्रे (Madhur Mhatre), कीर्ति ढोणे (Kirti Dhone), राहुल कोट (Rahul Kot) और स्वप्नील केने (Swapnil Kene) शामिल हैं।
हालांकि ठाणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब तक गुमशुदगी का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, क्योंकि पार्षदों की अपनी मर्जी से यह कदम उठाने की आशंका है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के चार में से दो पार्षद सीधे शिंदे गुट के संपर्क में हैं, जबकि अन्य दो वापस राज ठाकरे की मनसे में जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के चलते शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिह्न पर लड़े थे और अब दोबारा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) में लौट सकते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) के केडीएमसी में कुल 11 पार्षद हैं। इनमें से केवल 7 पार्षदों ने ही कोंकण संभागीय आयुक्त के पास औपचारिक रूप से समूह के रूप में पंजीकरण कराया है। जबकि चार पार्षद पार्टी के संपर्क में नहीं है।
इस पूरे मामले पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमारे पार्षद लापता हैं, इसलिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्षद पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए और जीत के 24 घंटे के भीतर अलग रास्ता चुन लिया। ये गद्दार हैं। हम केडीएमसी में इनके पोस्टर लगाएंगे।“
122 सीटों वाली कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) में सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए बहुमत का 62 का आंकड़ा पार करना जरूरी है, जिसे लेकर महायुति और ठाकरे भाइयों के बीच भारी खींचतान मची हुई है।
वर्तमान समीकरणों को देखें तो 122 सदस्यीय केडीएमसी में शिंदे गुट की शिवसेना के पास फिलहाल 53 पार्षद हैं, जबकि महायुति में शिंदे गुट की सहयोगी भाजपा के पास 50 पार्षद हैं। इसके अलावा मनसे के 5 पार्षदों का समर्थन भी शिंदे गुट को मिला हुआ है। अगर शिवसेना (उद्धव गुट) के ये चार कथित लापता पार्षद भी शिंदे गुट के पाले में जाते हैं, तो शिवसेना कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में बहुमत के जादुई आंकड़े 62 तक पहुंच सकती है।
इस वजह से न सिर्फ सत्तारूढ़ महायुति, बल्कि ठाकरे भाइयों के खेमे में भी बेचैनी बढ़ गई है। शिवसेना (यूबीटी) पहले ही शिंदे गुट को मनसे के समर्थन देने पर नाराजगी जता चुकी है। हालांकि मनसे के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अगर उनकी पार्टी ने शिंदे गुट का समर्थन नहीं किया होता, तो उनके पार्षद खुद उस खेमे में चले जाते।
उधर, शिंदे गुट को मेयर पद पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए केवल 4 और पार्षदों की जरूरत है। यदि उद्धव गुट के ये चारों पार्षद पाला बदलते हैं, तो शिंदे गुट मेयर पद पर दावा करेगा। वहीं, भाजपा भी मेयर पद की मांग कर रही है, जिससे 'महायुति' के भीतर भी तनाव देखा जा रहा है।