मुंबई

क्या TMC की तरह टूटने वाली है उद्धव की शिवसेना? संजय राउत बोले- ये अमित शाह की सोची समझी रणनीति

Uddhav Thackeray Shiv Sena: पिछले कई महीनों से अटकलें लगाई जा रही हैं कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में हुई बगावत की तरह अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़ा झटका लग सकता है।

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Jun 10, 2026
Uddhav Thackeray Group MP
उद्धव ठाकरे और संजय राउत (Photo: IANS/File)

महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के टूटने की अटकलें एक बार फिर जोरों पर हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ठाकरे गुट के सात सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 7 जून को इन सांसदों ने दिल्ली में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से सीक्रेट मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि इस कथित बैठक में सांसदों को शिंदे गुट की ओर से खास ऑफर भी दिया गया है।

इन तमाम चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत ने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने दावा किया कि ठाकरे गुट का कोई भी सांसद पार्टी छोड़ने वाला नहीं है और सभी सांसद मजबूती से उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।

संजय राउत ने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से केंद्रीय गृह मंत्री व भाजपा नेता अमित शाह की एक सुनियोजित सियासी रणनीति है, जिसके तहत पार्टी में टूट की अफवाहें फैलाई जा रही हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए राज्य सभा सांसद राउत ने कहा, हमारे सभी सांसद पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यह एक रणनीति है कि पहले राजनीतिक माहौल में भ्रम पैदा किया जाए और फिर पार्टी में टूट की खबरें फैलाई जाएं।

उद्धव ठाकरे लगातार सांसदों के संपर्क में- राउत

संजय राउत ने कहा कि पार्टी नेतृत्व का सभी सांसदों से लगातार संवाद जारी है। उन्होंने बताया कि स्वयं उद्धव ठाकरे भी सांसदों के सीधे संपर्क में हैं और पार्टी की गतिविधियों पर नियमित चर्चा हो रही है।

राउत ने कहा, "जिन लोगों को पार्टी छोड़नी थी, वे पहले ही जा चुके हैं। अभी न राज्य में कोई चुनाव है और न ही लोकसभा चुनाव निकट हैं। लोकसभा चुनाव में अभी लगभग तीन साल का समय बाकी है। ऐसे में सांसदों के टूटने की चर्चाओं में कोई सच्चाई नहीं है।"

'जिन्हें जाना होता है, वे चले जाते हैं'

संजय राउत ने अपने बयान में उन नेताओं पर भी तीखा हमला बोला, जो पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मन में बेईमानी आ जाती है, उन्हें कोई भी पद, सम्मान या अवसर रोक नहीं सकता। जिसे पार्टी छोड़नी होती है, वह किसी भी परिस्थिति में चला जाता है। चाहे उसके लिए कुछ भी किया जाये। जब गद्दारी की मानसिकता किसी नेता में घर कर जाती है, तो वह 35-40 वर्षों की निष्ठा को भी भुला देता है।

टीएमसी के बाद उद्धव सेना की बारी?

भले ही उद्धव खेमे की ओर से सांसदों के टूटने की सभी अटकलों को खारिज कर दिया गया हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अभी भी गर्म है। वो भी तब जब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी टूट गई है, ठीक वैसे ही जैसे 2022 में उद्धव ठाकरे की शिवसेना बिखरी थी. वर्षों से ममता बनर्जी के वफादार रहे कई नेता अब उनका साथ छोड़ चुके हैं.

जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के लोकसभा में 28 सांसदों में से 20 ने एक दिन पहले बगावत के बाद ममता का साथ छोड़ दिया और भाजपा नीत एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद अब ममता बनर्जी टीएमसी का कथित तौर पर कांग्रेस में विलय करने पर विचार कर रही हैं।

Updated on:
10 Jun 2026 04:33 pm
Published on:
10 Jun 2026 04:31 pm