मुंबई

‘अब चुप नहीं बैठेंगे’: मुंबई से दिल्ली तक युवाओं का सफर, विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए घर छोड़ पहुंचे राजधानी

Delhi Protest News: मुंबई के कई युवा परिवार की चिंता, बिना रिजर्वेशन के सफर और तमाम मुश्किलों के बावजूद दिल्ली पहुंचे, ताकि 'चलो संसद' मार्च में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद कर सकें। युवाओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध, जवाबदेही और अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है।
2 min read
• •
Updated: 21 Jul 2026, 9:34 AM IST
NEET Protest
मुंबई से लेकर दिल्ली की सड़कों तक युवाओं ने चुना 'चलो संसद' का रास्ता। फोटो सोर्स-@CJP_for_India

Chalo Sansad March: राजधानी दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च में शामिल होने के लिए मुंबई से बड़ी संख्या में युवा अलग-अलग परेशानी का सामना करते हुए पहुंचे। किसी ने परिवार की नाराजगी झेली, किसी ने बिना रिजर्वेशन के लंबा सफर तय किया, तो कोई घरवालों को बताए बिना ही दिल्ली के लिए रवाना हो गया। इन युवाओं का कहना है कि वे सिर्फ किसी एक मुद्दे के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जवाबदेही की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाने पहुंचे हैं।

मुंबई के रहने वाले अंतिम वर्ष के कानून के छात्र बुधिराज तोराने भी ऐसे ही युवाओं में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां और उन्हें 'चीनी एजेंट' बताए जाने वाले पोस्ट देखे, तो उन्हें लगा कि अब केवल सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देना काफी नहीं है। उन्होंने तय किया कि उन्हें खुद दिल्ली जाकर प्रदर्शन का हिस्सा बनना चाहिए।

इस समय दर्शक बने रहना ठीक नहीं

तोराने बिना कन्फर्म टिकट के ट्रेन के सामान्य डिब्बे में बैठकर दिल्ली पहुंचे। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है। यदि लोग अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो उन्हें सुना जाना चाहिए। ऐसे समय में केवल दर्शक बने रहना उन्हें सही नहीं लगा।

दिल्ली पहुंचे कई अन्य युवाओं की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। किसी ने माता-पिता को काफी समझाने के बाद यात्रा की इजाजत ली, जबकि कुछ युवाओं ने परिवार की चिंता से बचने के लिए बिना बताए ही सफर शुरू कर दिया। उनके मुताबिक, यह यात्रा सिर्फ एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए थी।

NEET से संसद तक का सफर

बताया जा रहा है कि यह आंदोलन शुरुआत में नीट (NEET) परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध से जुड़ा था, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया। अब प्रदर्शनकारी सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। हाल ही में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने और सीजेपी के अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने की घटना ने भी कई युवाओं को आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

ऐसे में मुंबई से दिल्ली तक का यह सफर सिर्फ सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने का नहीं, बल्कि उन युवाओं की सोच को भी सामने लाता है जो मानते हैं कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिक की जिम्मेदारी भी है और अधिकार भी।

Updated on:
21 Jul 2026, 9:34 AM IST
Published on:
Also Read
View All
पुणे शिक्षक सीट पर भाजपा को बढ़त, कांग्रेस के मौजूदा विधायक जयंत आसगावकर पिछड़े, शुरुआती रुझानों ने चौंकाया

‘झूठ बोलने में माहिर हैं’, चुनाव आयोग पर भड़के शिवसेना सांसद अरविंद सावंत, मुख्य चुनाव आयुक्त को बताया ‘झूठों का सरदार’

‘नकारात्मकता के मुंह पर तमाचा’, विजय देवरकोंडा की ‘राणाबाली’ के सपोर्ट में उतरे भाई आनंद, पोस्ट शेयर कर दिया जवाब

​​​​​Pune Graduate Election: पुणे स्नातक चुनाव में हर्षदा देशमुख जाधव का जीत का दावा, बोलीं- बढ़ा मतदान बदलाव का संकेत

लव गिल के सपोर्ट में आईं बादशाह की एक्स-वाइफ ईशा रिखी, बोलीं- ‘सिर्फ उन्हें ही क्यों दोष दिया जा रहा है?