
Kusum Smelters Plant Accident: कुसुम स्मेल्टर्स प्लांट में एक बार फिर औद्योगिक दुर्घटना सामने आने से सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरगांव क्षेत्र के रामबोड़ स्थित इस प्लांट में 18 जून की सुबह नियमित मेंटेनेंस कार्य के दौरान हुए हादसे में तीन कर्मचारी झुलस गए। हालांकि राहत की बात यह है कि सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। लेकिन यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इसी प्लांट का नाम पिछले साल हुए एक बड़े हादसे के कारण पहले से ही चर्चाओं में रहा है।
जानकारी के अनुसार, कुसुम स्मेल्टर्स प्लांट में कीलन डिस्चार्ज गेट जाम हो गया था। इसे ठीक करने के लिए कर्मचारियों द्वारा नियमित मेंटेनेंस कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक डिस्चार्ज गेट खुल गया और उसके भीतर जमा अत्यधिक गर्म स्पंज आयरन तेज गति से बाहर निकल आया। गर्म सामग्री की चपेट में आने से वहां मौजूद तीन कर्मचारी आंशिक रूप से झुलस गए। घटना के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अन्य कर्मचारियों और प्रबंधन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घायलों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई गई।
हादसे में घायल कर्मचारियों की पहचान बिहार के औरंगाबाद निवासी अमित कुमार, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद निवासी योगेश मीणा तथा ओडिशा के बालेश्वर निवासी अमरेश दत्ता के रूप में हुई है। घटना के तुरंत बाद प्लांट प्रबंधन ने एम्बुलेंस की मदद से सभी घायलों को बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद अमित कुमार की स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया। वहीं अन्य दोनों कर्मचारियों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने जिला प्रशासन को सूचित किया। सूचना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की। जिला प्रशासन ने कहा है कि घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है तथा उनके उपचार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर प्रारंभिक जानकारी जुटाई है। वहीं संबंधित विभाग को हादसे के कारणों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई या फिर सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं कोई चूक हुई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
रामबोड़ स्थित कुसुम स्मेल्टर्स प्लांट का नाम इससे पहले जनवरी 2025 में हुए एक बड़े औद्योगिक हादसे के कारण पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहा था। 9 जनवरी 2025 को प्लांट परिसर में स्थित एक विशाल साइलो (भंडारण संरचना) अचानक भरभराकर ढह गया था। साइलो गिरने से उसके मलबे में कई श्रमिक दब गए थे। घटना के बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
प्रारंभिक जानकारी में एक मजदूर की मौत और कई लोगों के फंसे होने की सूचना सामने आई थी। बाद में कई घंटों तक चले बचाव अभियान के दौरान मृतकों की संख्या बढ़कर चार तक पहुंच गई थी। उस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा और निर्माण मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले में पुलिस ने जांच के बाद प्लांट प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का मामला भी दर्ज किया था।
ताजा दुर्घटना के बाद एक बार फिर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन प्रणाली चर्चा में आ गई है। पिछले डेढ़ वर्ष के भीतर यह दूसरा बड़ा हादसा है जिसने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि इस बार जनहानि नहीं हुई, लेकिन लगातार सामने आ रही दुर्घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन और नियमित ऑडिट की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इस हादसे के पीछे तकनीकी खामी थी या सुरक्षा प्रक्रियाओं में कोई गंभीर चूक।