
Muzaffarnagar Farmer Murder Case: मुजफ्फरनगर के चर्चित किसान राज सिंह हत्याकांड में करीब 15 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। साल 2011 में रोड होल्डअप कर लूटपाट के दौरान किसान की गोली मारकर हत्या करने वाले चार दोषियों को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे जघन्य अपराध हुए चारों पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं अदालत ने न्याय में देरी पर भी चिंता जताई।
यह मामला 28 अगस्त 2011 का है। भोकरहेड़ी निवासी किसान राज सिंह अपने दोस्त बिजेंद्र सिंह के साथ बाइक से शामली के कुड़ाना गांव जा रहे थे। दोनों जन्माष्टमी के मौके पर राज सिंह की बहन पिंकी के घर कोथली देने जा रहे थे। कुड़ाना गांव से करीब एक किलोमीटर पहले चार बदमाशों ने दोनों को रास्ते में रोक लिया। बदमाशों ने राज सिंह से रुपये और बाइक लूट ली। वहीं बिजेंद्र सिंह से करीब 750 रुपये छीन लिए गए।
विरोध करने पर बदमाशों ने राज सिंह को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बिजेंद्र सिंह के साथ मारपीट की और उनके हाथ-पैर बांधकर उन्हें बाग में फेंक दिया था।
इस मामले में शामली थाने में राज सिंह के रिश्तेदार राहुल सिंह ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस जांच के बाद अजीत और सूरज उर्फ काला निवासी बहावड़ी, अनिल निवासी वहलना और सुनील कश्यप निवासी घुसवा, जनपद देवरिया को आरोपी बनाया गया। करीब 15 साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों और अन्य सबूतों को अदालत के सामने पेश किया। 9 जुलाई को न्यायालय ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था।
सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 57 पेज के आदेश में चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि किसान की हत्या क्रूर तरीके से की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी आदतन अपराधी हैं। (अपराधों के लिए पहले भी सजा मिल चुकी हो) इसमें लूट व हत्या जैसे गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। इनमें अजीत और सुनील को पहले भी एक अन्य मामले में 20 दिसंबर 2022 को पांच-पांच साल की सजा सुनाई जा चुकी है।
फैसला सुनाते समय अदालत ने मुकदमे में हुई देरी पर चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में यह कहावत है कि जस्टिस डिनाइड इज जस्टिस डिलेड। अदालत ने कहा कि अपराध और सजा के बीच लंबा अंतर अपराधियों के मन से कानून का डर कम कर सकता है। 15 साल तक चले इस मामले में देरी न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।