मुजफ्फरनगर में महसूस किए गए भूकंप के झटके
मुजफ्फरनगर. देश में चंद्रगहण के बाद मुजफ्फरनगर में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि अभी तक किसी तरह के किसी नुकसान की सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि यह भूकंप 8 बजकर 35 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई है। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोगों में दहशत फैल गई। यहां बता दें कि खगोलविदों ने चंद्रग्रहण के बाद पहले ही भूकंप की संभावना जताई थी। मेरठ के वरिष्ठ खगोलविद् डॉ. कंचन सिंह ने बताया था कि मंगल ग्रह और चंद्र ग्रहण की संयुक्त खगोलीय घटना के कारण विश्व के किसी भी हिस्से में भूकंप आ सकता है, क्योंकि इससे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण पर इसका प्रभाव पड़ेगा।
जानकारी के अनुुसार आज सुबह मुजफ्फरनगर में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच अचानक भूकंप के झटके आने से लोग घरों के बाहर आ गए। हालांकि तीव्रता काफी कम होने के कारण कहीं से किसी जनहानि या नुकसान की खबर नहीं है। अब इसे चंद्रग्रहण से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, मेरठ की वरिष्ठ खगोलविद् डाॅ. कंचन सिंह ने चंद्रग्रहण से पहले ही भूंंकप की संभावना व्यक्त की थी। उन्होंने पत्रिका को बताया था कि सदी के सबसे लंबे चंद्रगहण को लेकर खगोल विशेषज्ञों समेत ज्योतिषियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले सभी लोगों को काफी उत्सुकता है। उनका कहना था कि चंद्रग्रहण के दौरान मंगल ग्रह पृथ्वी के अधिक निकट आ जाएगा। मंगल ग्रह के पृथ्वी पर अधिक नजदीक आने की यह खगोलीय घटना सदी में पहली बार हो रही है। उन्होंने बताया कि नासा ने इसके प्रयोग और अध्ययन के लिए अंतरिक्ष और अपने परिसर में विशालकाय दूरबीन लगाई है, जिससे इस ग्रह का अध्ययन ग्रहण काल के दौरान किया जा सके।
डाॅ. कंचन सिंह ने बताया था कि मंगल ग्रह और चंद्र ग्रहण की संयुक्त खगोलीय घटना के कारण विश्व के किसी भी हिस्से में भूकंप आने की संभावना है, क्योकि इससे पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण पर इसका प्रभाव पड़ेगा। डॉ. कंचन सिंह ने बताया कि एक वर्ष के भीतर होने वाले ग्रहणों में चार सूर्यग्रहण और तीन चंद्रग्रहण या फिर पांच सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण का संयोजन होता है। अगर एक वर्ष में सिर्फ दो ही ग्रहण होते हैं तो वे दोनों सूर्यग्रहण होते हैं।