
कुचामनसिटी। एक साल पहले 7 अक्टूबर 2025 की सुबह कुचामन में हुई रमेश रूलानिया की हत्या ने पूरे शहर को हिला दिया था। स्टेशन रोड स्थित जिम में कसरत करने पहुंचे बाइक एजेंसी संचालक एवं व्यवसायी रमेश रूलानिया पर तीन नकाबपोश बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। गंभीर रूप से घायल रमेश को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अब इस हत्याकांड को एक साल पूरा हो गया है। जांच में पुलिस ने 22 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है।
7 अक्टूबर 2025 को सुबह करीब साढ़े पांच बजे रमेश रोज की तरह जिम पहुंचे थे। इसी दौरान तीन नकाबपोश बदमाश वाहन से वहां पहुंचे। वाहन सड़क पर खड़ा करने के बाद वे जिम की दूसरी मंजिल पर पहुंचे और रमेश पर फायरिंग कर दी। वारदात के बाद बदमाश फरार हो गए। गोलियों की आवाज से इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नाकाबंदी करवाई। अस्पताल के बाहर भीड़ जुट गई और शहर में आक्रोश फैल गया। रमेश की मौत के बाद परिजन और सर्व समाज के लोग थाने के सामने धरने पर बैठ गए। शहर बंद रहा और हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया।
हत्याकांड की जांच के दौरान लॉरेंस गैंग के नाम पर रंगदारी मांगने का एंगल भी सामने आया। पुलिस के अनुसार, इससे पहले कुचामन के कुछ प्रतिष्ठित व्यापारियों को कथित तौर पर रोहित गोदारा के नाम से ऑनलाइन कॉल कर रंगदारी के लिए धमकाया गया था। पुलिस ने स्थानीय नेटवर्क की तलाश शुरू की और शफीक खान सहित कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इसके बाद इसी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए रमेश हत्याकांड से जुड़े लोगों तक पहुंचने की जांच आगे बढ़ाई गई। हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर वीरेंद्र चारण के नाम से एक पोस्ट भी वायरल हुई थी, जिसमें रोहित गोदारा गैंग की ओर से हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था।
पुलिस अब तक रमेश हत्याकांड और इससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क में 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि, मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच पर सवाल कायम हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई कब सामने आएगी और न्याय कब मिलेगा।
रमेश की हत्या के बाद भी कुचामन में अपराध और रंगदारी को लेकर भय का माहौल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इसके बाद भी अलग-अलग लोगों को रंगदारी और धमकियों से जुड़े मामले सामने आते रहे। यही वजह है कि यह हत्याकांड अब केवल एक साल पुरानी हत्या का मामला नहीं, बल्कि कुचामन में संगठित अपराध, रंगदारी और अपराधियों के नेटवर्क को लेकर बड़ा सवाल बन चुका है। दावा यह भी है कि आपराधिक गिरोहों के कुछ संचालक विदेशों में बैठकर नेटवर्क चला रहे हैं। ऐसे में स्थानीय सहयोगियों और नेटवर्क की कड़ियों तक पहुंचना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है।
रमेश रूलानिया हत्याकांड में पुलिस ने अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार की चुकी है। शातिर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए स्थानीय स्तर पर आपराधिक संगठनों के जो फॉलोवर्स या गिरोह से जुड़े हुए अपराधिक तत्वों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।