
इजरायली सेना ने लेबनान के दक्षिणी इलाके में भारी बमबारी की है। इस हमले में 16 लोग मारे गए हैं। इजरायली सेना ने कहा कि रात भर दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ भारी संघर्ष हुआ है। लेबनान में इजरायली हमले का अमेरिका ईरान शांति समझौते पर भी असर पड़ सकता है।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक कि लेबनान से हिजबुल्लाह पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता। वहीं, इस हमले में चार इजरायली सैनिकों की भी मौत हुई है। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह संग संघर्ष के दौरान एक हमले में एक टैंक बटालियन समेत 4 सैनिकों की मौत हो गई। टाइम्स ऑफ इजरायल ने रिपोर्ट किया कि हिजबुल्लाह के हलमे में 32 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल डोर गेडालिया बेन सिम्होन की मौत हो गई। वह इजराइल की 401वीं आर्मर्ड ब्रिगेड की 52वीं बटालियन के कमांडर थे। रिपोर्ट के मुताबिक बटालियन कमांडर के टैंक को किसी संदिग्ध ड्रोन या एंटी-टैंक मिसाइल से निशाना बनाया गया था।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुका है। फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर दस्तख्त किए। ईरान ने 14 सूत्रीय मांगों में लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई को खत्म करने की मांग की है, लेकिन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि वह इस समझौते को मानने के लिए बाध्यकारी नहीं है।
अब कहा जा रहा है कि इजरायल में शांति समझौते को लेकर भारी नाराजगी है। पीएम नेतन्याहू अमेरिका-ईरान के अंतिम समझौते को प्रभावित करने की कोशिश में हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, वह दक्षिणपंथी मीडिया हस्तियों और इजराइल समर्थक अमेरिकी सांसदों के जरिए राष्ट्रपति ट्रम्प पर दबाव बनाना चाहते हैं।
ईरान ने इजरायली कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उधर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा टल गई है। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत की तैयारी जारी है और दोनों पक्ष हाल ही में हस्ताक्षर किए गए ज्ञापन समझौते को लागू करने के मकसद से बातचीत के अगले चरण को शुरू करने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने गुरुवार देर रात कहा कि जैसा कि उपराष्ट्रपति ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आने वाली तकनीक बातचीत की योजना अभी तय नहीं हुए हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पहले मौके पर निकलने के लिए तैयार है, लेकिन इन बातचीत की व्यवस्था कभी भी आसान या अंदाजा लगाने लायक नहीं रही है।