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7 AAP सांसदों के आने से BJP मजबूत हुई, पर संविधान संशोधन का रास्ता अब भी दूर, और कितने नंबरों की जरूरत?

राघव चड्ढा सहित आप के सात सांसदों के जुड़ने से भले ही भाजपा को नई ताकत मिल गई है। लेकिन संविधान संशोधन के लिए एनडीए को अभी और नंबरों की आवश्यकता है। यहां समझें पूरा गणित

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Apr 25, 2026
राघव चड्ढा और पीएम मोदी। (सांकेतिक तस्वीर- AI)

17 अप्रैल 2026 का वो दिन भारत में एनडीए सरकार के लिए किसी झटके से कम नहीं था। संसद के निचले सदन (लोकसभा) में महिला आरक्षण विधेयक यानी संविधान संशोधन (131वां) बिल गिर गया।

लोकसभा में 816 सीटें बढ़ाने और 2029 से 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने का सपना, बहुमत के अभाव में धूल चाटता रह गया।

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यह पहली बार था जब मोदी सरकार के कार्यकाल में कोई संविधान संशोधन बिल संख्या बल की कमी से हार गया। यह हार एक सवाल छोड़ गई, क्या एनडीए के पास वाकई वो ताकत है जो बड़े फैसले लेने के लिए चाहिए?

AAP के 7 सांसदों ने बदला समीकरण

इसी सवाल के बीच शुक्रवार को दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ। आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पाला बदल लिया और भाजपा के साथ मिल गए।

राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन की मंजूरी मिलने के बाद AAP संसदीय दल का भाजपा में विलय हो जाएगा। इससे भाजपा की राज्यसभा में सदस्य संख्या 106 से बढ़कर 113 हो जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक, यह विलय इसलिए वैध माना जाएगा क्योंकि ये 7 सांसद राज्यसभा में AAP के कुल सदस्यों के दो तिहाई से ज्यादा हैं, यानी दलबदल विरोधी कानून इन पर लागू नहीं होगा।

145 का आंकड़ा, लेकिन 163 अभी भी दूर

इस बड़े बदलाव के बाद NDA के पास राज्यसभा में अब 145 सांसदों का समर्थन है। 7 मनोनीत सदस्य और 2 निर्दलीय भी BJP के साथ खड़े हैं, जिससे BJP का अपना समर्थन आधार 122 तक पहुंच जाता है, यानी सदन की ठीक आधी संख्या। लेकिन असली लक्ष्य अभी भी हाथ से दूर है।

244 सदस्यों वाली राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसद चाहिए। एनडीए में अभी भी 18 सदस्य कम हैं। सामान्य बहुमत यानी 122 के लिए BJP खुद 10 सीट पीछे है।

संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में चाहिए विशेष बहुमत

भारतीय संविधान के तहत किसी भी संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो तिहाई बहुमत जरूरी है।

लोकसभा में NDA के पास साधारण बहुमत है, लेकिन 543 सीटों वाले सदन में 363 सांसदों की जरूरत विशेष बहुमत के लिए होती है, जो अभी नहीं है। यानी महिला आरक्षण जैसे बड़े विधेयक पास कराने की राह अभी भी आसान नहीं है।

और दलों को लाना जरूरी

AAP सांसदों के आने से NDA को राज्यसभा में ताकत जरूर मिली है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं। सरकार को अगर संविधान बदलना है तो उसे और दलों को साथ लाना होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में और दलों से बातचीत तेज हो सकती है।

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