
TMC crisis: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसद बागी हो गए है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में अलग से बैठने की अनुमति देने की मांग की है। इस गुट का नेतृत्व सांसद काकोली घोष कर रही है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि काकोली गुट यह कह रहा है कि हम किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं करेंगे, बल्कि अलग बैठेंगे। जबकि कानून के तहत दो शर्तें हैं—पहली, किसी राजनीतिक दल का दूसरे राजनीतिक दल में विलय होना चाहिए और दूसरी, विधायी दल (लेजिस्लेचर पार्टी) के कम से कम दो-तिहाई सदस्य सामूहिक और संयुक्त रूप से उस विलय का समर्थन करें।
उन्होंने आगे कहा कि इसके विपरीत, ये सांसद सीधे तौर पर दलबदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के दायरे में आते हैं। स्पीकर उन्हें पांच मिनट में अयोग्य घोषित कर सकते हैं और करना भी चाहिए, क्योंकि वे स्वयं कह रहे हैं कि हम किसी पार्टी में विलय नहीं कर रहे, बल्कि एक अलग समूह हैं। अलग समूह (सेपरेट ग्रुप) जैसी कोई अवधारणा कानून में है ही नहीं। ऐसा कुछ नहीं होता।
इसी बीच टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी के लगातार चल रहे ऑपरेशन लोटस का हिस्सा है। उन्होंने टीएमसी के लोगों को लालच दिया और धमकाया। जो लोग कमजोर हैं, जिनके पास सिद्धांत नहीं हैं या जिनकी विचारधारा मजबूत नहीं है, वे पार्टी छोड़कर चले गए हैं। भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ बीजेपी के 'ऑपरेशन लोटस' को कुछ हद तक सफलता मिली है।
उन्होंने कहा कि बागी सांसदों में पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति विश्वास की कमी है, इसलिए वे जा रहे हैं। मुझे नहीं पता कि बीजेपी उन्हें अपने दल में शामिल करेगी या नहीं। अभी तक इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है। वे फिलहाल अलग गुट के रूप में बैठने की बात कर रहे हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी संकट से गुजर रही है। पार्टी के 19 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है। बताया जा रहा है कि ये सांसद सदन में एनडीए का साथ देंगे। इन सांसदों के नाम की लिस्ट भी सामने आई है। जिसमें सायोनी घोष से लेकर युसुफ पठान का नाम शामिल हैं।