
Gujarat Blast News: अहमदाबाद के रामोल-गात्राड रोड स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक जिस फैक्ट्री में धमाका हुआ, उसका लाइसेंस पहले ही समाप्त हो चुका था और उसे बंद करने की सिफारिश भी की गई थी। इसके बावजूद फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण जारी था। इस हादसे में तीन बच्चों समेत नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, 'न्यू गुजरात फायर वर्क्स' नाम से संचालित यह यूनिट अहमदाबाद के वस्त्राल गांव की सीमा में सर्वे नंबर 629/1/2/3 पर स्थित थी। फैक्ट्री का लाइसेंस 4 मार्च 2026 तक ही वैध था। पिछले साल डीसा में हुए पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद गुजरातभर में निरीक्षण के दौरान इस यूनिट में मंजूर नक्शे के विपरीत निर्माण पाया गया था, जिसके बाद लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई थी। 23 मार्च को दोबारा निरीक्षण और पंचनामा भी किया गया था। अधिकारियों के अनुसार उस समय फैक्ट्री बंद मिली थी, लेकिन पुलिस का आरोप है कि रथ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल की व्यस्तता का फायदा उठाकर करीब 10 से 15 दिन पहले यहां दोबारा अवैध रूप से उत्पादन शुरू कर दिया गया।
शनिवार दोपहर करीब 3:45 बजे रामोल थाना क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) कैंप के पीछे नहर के पास स्थित फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट हुआ। धमाके की आवाज करीब पांच किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट से फैक्ट्री के शेड पूरी तरह ढह गए, आसपास की औद्योगिक इकाइयों के शीशे टूट गए और करीब 500 मीटर दूर स्थित एक फैब्रिकेशन यूनिट के सीसीटीवी कैमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए। आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे कर्मचारी दहशत में बाहर निकल आए। सबसे पहले RAF के जवान मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। बाद में अहमदाबाद फायर एंड इमरजेंसी सर्विस (AFES) और पुलिस ने मिलकर घायलों को एल.जी. अस्पताल और सिविल अस्पताल पहुंचाया।
अहमदाबाद पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकांश मजदूर दाहोद जिले के संजेली क्षेत्र से लाए गए थे। उन्हें आगामी गणेश उत्सव के ऑर्डर पूरे करने के लिए पटाखे बनाने में लगाया गया था।
पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच में पता चला है कि पटाखों में बारूद भरने के दौरान निकली चिंगारी से विस्फोट हुआ। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और विस्फोटक एक्सपर्ट ने मौके से सबूत जुटाए हैं। पुलिस आयुक्त ने बताया कि यदि लाइसेंस वैध भी होता, तब भी फैक्ट्री में अधिकतम 15 किलोग्राम विस्फोटक रखने की अनुमति थी, जबकि मौके से इससे कहीं अधिक मात्रा में बारूद से भरे कई बोरे मिले। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री के पास संचालन के लिए न तो वैध लाइसेंस था, न फायर सेफ्टी की मंजूरी और न ही अन्य आवश्यक अनुमतियां।
रामोल पुलिस ने रमिला डोडिया, मेहुल डोडिया और उनके कथित साझेदार सादिक सैयद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 287, 288 और 61(2), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 5(ए) और 6 तथा विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि तीनों ने आर्थिक लाभ के लिए अवैध रूप से फैक्ट्री संचालित की और सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर मजदूरों की जान खतरे में डाली। रमिला डोडिया और सादिक सैयद को घटना के कुछ घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, विस्फोट के दौरान घायल होने के बावजूद मौके से फरार हुए मेहुल डोडिया को रविवार को साबरमती इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। इस हादसे के बाद अहमदाबाद और आसपास के इलाकों में अवैध पटाखा फैक्ट्रियों के खिलाफ अभियान चलाया गया।