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सड़क पर भीख मांगने और सोने की आ गई थी नौबत, बस एक आरोप ने छीन ली टॉप पायलट की घर, बच्चे और नौकरी

Air India Pilot Jitendra Krishna Verma: सिर्फ एक आरोप ने एयर इंडिया के टॉप पायलट जितेंद्र वर्मा की नौकरी, घर और बच्चों तक को उनसे छीन लिया। 15 साल की कानूनी लड़ाई के बाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दी है।

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Jun 10, 2026
Jitendra Krishna Verma
फोटो में एयर इंडिया के टॉप पायलट जितेंद्र वर्मा ( इमेज सोर्स: एक्स यूजर Richard Almeida पोस्ट स्क्रीनशॉट)

Bombay High Court: एक समय था जब जितेंद्र कृष्ण वर्मा सबसे अनुभवी और टेलेंटेड पायलटों में गिने जाते थे। वह एयर इंडिया के बेड़े में मौजूद तीनों तरह के विमानों को उड़ाने वाले चुनिंदा पायलटों में उनका नाम शामिल था। 22 साल का बेदाग रिकॉर्ड, शानदार करियर और आसमान जैसी ऊंची उड़ानें..., लेकिन फिर एक आरोप ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। नौकरी चली गई, घर छूट गया, परिवार बिखर गया और बच्चों से भी दूरी हो गई। अब 15 साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के एक बड़े फैसले ने न सिर्फ उन्हें राहत दी है, बल्कि उनके सम्मान और सपनों को भी नई उड़ान देने का रास्ता खोल दिया है।

एक आरोप और बिखर गई पूरी जिंदगी

मार्च 2011 में शंघाई से दिल्ली लौटे जितेंद्र वर्मा को अचानक दिल्ली पुलिस ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर फ्लाइंग लाइसेंस हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। हालांकि उन्हें कुछ ही दिनों में जमानत मिल गई, इसके बाद शुरू हुई मुश्किलों का सिलसिला वर्षों तक चलता रहा। ‘नागरिक उड्डयन महानिदेशालय’ (DGCA) ने उनका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और जल्द ही उनकी नौकरी भी चली गई।

हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए इंटरव्यू में जितेंद्र वर्मा बताते हैं कि उन्होंने इससे पहले कभी कोर्ट या पुलिस स्टेशन का सामना नहीं किया था, लेकिन अचानक मीडिया ट्रायल का हिस्सा बन गए। तब वह घबरा गए थे। फिर कुछ समय बाद इन सब चीजों का असर उनके लाइफ पर पड़ गया। आलम ये हुआ कि पहले उनका घर बिक गया, फिर तलाक हो गया और बच्चे की कस्टडी भी उनसे छिन ली गई।

इंटरव्यू में उन्होंने आपबीती बताते हुए आगे कहा कि आर्थिक हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें सड़क पर भीख मांगने और सोने की नौबत आ गई थी। हार मानकर फिर उन्हें अपने पिता के पास गुजरात जाना पड़ा। उनके लिए दोस्त, परिवार सहारा बने।

हाईकोर्ट ने कहा- नियमों को ताक पर रखकर हुई कार्रवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि DGCA ने बिना जांच, बिना कारण बताओ नोटिस और बिना पर्याप्त सबूत के लाइसेंस निलंबित कर दिया था। अदालत ने इसे गैर-कानूनी और मनमाना फैसला बताया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 15 साल बाद भी आरोप साबित नहीं हो सके और संबंधित दस्तावेज तक पेश नहीं किए गए।

अब अदालत ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को दो महीने के भीतर वर्मा का पक्ष सुनकर नया और तर्कसंगत फैसला लेने का निर्देश दिया है। 61 साल के वर्मा के पास पायलट के रूप में उड़ान भरने के लिए केवल चार साल का समय बचा है। फिर भी उनका कहना है कि उड़ान उनका जुनून है और वह एक बार फिर आसमान में लौटने के लिए तैयार हैं। अब वह फिर से जीना चाहते हैं। वह खुलकर उड़ना चाहते हैं।

उन्होंने आगे ये भी कहा कि पिछले 15 सालों में टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग का तरीका बदल गया है, इसलिए उन्हें अपडेट होना है। इसके बाद लाइसेंस और बाद मेडिकल चेकअप करवाना होगा। उनके मुताबिक, यह एक लंबा प्रोसेस है।

बता दें जितेंद्र वर्मा को 1988 में फ्लोरिडा और ऑरलैंडो से ट्रेनिंग ली थी। अनुभव की बात करें तो उनके पास करीब 7,000 घंटे उड़ान भरने का अनुभव है।

Published on:
10 Jun 2026 12:01 pm