महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की असामयिक की मौत से महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मच गई है। अब बड़ा सवाल है कि उनके समर्थक 41 एनसीपी विधायक फडणवीस सरकार का साथ देंगे या शरद पवार गुट में शामिल होंगे।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं रहे। विमान हादसे में बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई। उनके जाने के बाद महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मच गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अजित को सपोर्ट करने वाले एनसीपी विधायक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार का समर्थन करेंगे या एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पाले में जाएंगे।
साल 2023 के जुलाई महीने में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से बगावत कर दी थी।
वह तब महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए। तब अजित पवार ने दावा किया था कि उनके साथ एनसीपी के अधिकांश विधायक हैं।
अजित पवार के इस कदम से शरद पवार को बड़ा झटका लगा था। शरद ने खुलकर यह तक कह दिया कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं सोचा था कि अजित उनके साथ ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि अजित ने उनके साथ विश्वासघात किया है।
उस समय एनसीपी के पास 53 विधायक थे। बगावत के बाद अजित पवार गुट के साथ अंततः 40-41 विधायक जुड़े रहे। शरद पवार गुट के पास 10-12 विधायक बचे। 2 जुलाई 2023 को अजित पवार ने एकनाथ शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ 8 अन्य विधायक को भी मंत्री बनाया गया।
अब अजित के जाने के बाद उनके विधायकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अब उनके बिना पार्टी में कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं दिख रहा। सुनेत्रा पवार (पत्नी), प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे जैसे नेता हैं, लेकिन इनमें आपसी खींचतान और मजबूत एकता की कमी है।
कई विश्लेषकों का कहना है कि बिना मजबूत नेतृत्व के ये विधायक शरद पवार के गुट में वापस जा सकते हैं। खासकर जब दोनों गुट पहले से जिला परिषद चुनाव में साथ आ चुके हैं और विलय की अटकलें तेज हैं।
5 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र में होने वाले जिला परिषद चुनाव में अजित और शरद पवार गुट एकसाथ मिलकर मैदान में हैं। दोनों 'घड़ी' सिंबल पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले, नगर निगम चुनाव में भी दोनों साथ मिलकर लड़े थे। हालांकि, दोनों गुटों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि दोनों गुट के कार्यकर्ता भी लंबे समय से एकता चाहते हैं। लोकल चुनाव में साथ लड़ना इसी का नतीजा था। इसके अलावा, 13 जनवरी 2026 को एक सभा में अजित पवार ने कहा था- राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता।'
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और अजित ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इससे यह अटकलें और तेज हो गईं कि दोनों गुट जल्द ही एकसाथ आ सकते हैं। अब अजित के जाने के बाद उनके विधायक क्या निर्णय लेते हैं, ये देखने वाली बात होगी।