
Congress: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई पर जवाब देने की पेशकश के बाद विपक्ष ने सरकार पर पलटवार किया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर संसद में गतिरोध पैदा किया और अगर गृह मंत्री को जवाब देना ही था तो वह एक सप्ताह पहले भी सदन में बयान दे सकते थे। विपक्ष का कहना है कि इस मुद्दे पर लगातार चर्चा और गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग की जाती रही, लेकिन सरकार ने इसे टालने की कोशिश की।
अमित शाह ने कहा है कि वह 20 जुलाई की घटना से जुड़े हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विपक्ष पर जानबूझकर चर्चा नहीं होने देने और संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि अगर सरकार जवाब देने को तैयार थी तो इतने दिनों तक सदन में इस मुद्दे पर चर्चा क्यों नहीं हुई।
संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े बहुमत वाली सरकार का सदन में आने से बचना दिखाता है कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देना चाहती। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के खिलाफ जो कार्रवाई हुई, वह गलत थी और सरकार के पास उसका जवाब नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास बहुमत होने के बावजूद अगर वह विपक्ष के सवालों से बच रही है तो इससे उसकी स्थिति पर सवाल उठते हैं।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि गुरुवार को संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन है और अब गृह मंत्री अचानक जवाब देने के लिए तैयार हुए हैं। उनके मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि सरकार ने जानबूझकर संसद में गतिरोध बनाए रखा। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि पूरी सरकार ने सत्र को ज्यादा से ज्यादा समय तक बाधित रखने की कोशिश की। विपक्षी दलों ने 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से बयान देने की लगातार मांग की थी।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने भी सरकार पर देर से प्रतिक्रिया देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में देश का कीमती समय और पैसा बर्बाद हुआ। हंगामे और वॉकआउट के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही। महुआ माजी ने कहा कि जब सदन का लगभग आखिरी दिन आ गया है और केवल आधा दिन बचा है, तब गृह मंत्री की ओर से जवाब देने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश पहले दिन से इस मुद्दे पर जवाब सुनना चाहता था तो इतनी देर क्यों की गई।
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने भी गृह मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार या गृह मंत्री की ओर से कुछ गलत नहीं किया गया था तो इतने दिनों तक जवाब देने से बचने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को हर दिन मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनके मुताबिक, गृह मंत्री पिछले सप्ताह ही बयान दे सकते थे और इससे संसद का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहता।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सत्र खत्म होने से ठीक पहले बयान देकर सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि संसद की कार्यवाही बाधित करने की जिम्मेदारी विपक्ष की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष कई दिनों से जवाब मांग रहा था और उसने कुछ गलत नहीं किया।