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असम में पार्टी क्यों छोड़ रहे कांग्रेस नेता! बड़ी वजह आई सामने, जानें प्रियंका के सामने अब क्या चुनौती

Assam elections 2026: विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है। कांग्रेस ने असम की जिम्मेदारी सांसद प्रियंका गांधी को दी है। 

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Mar 19, 2026
असम में 9 अप्रैल को होगी वोटिंग (Photo-IANS)

Assam Congress Crisis: असम में विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान होते ही राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने का भी सिलसिला शुरू हो गया है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़े झटके लगे हैं। तारीख के ऐलान से पहले भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए। वहीं अब सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और असम प्रदेश कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।

प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल हो गए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है। कांग्रेस ने असम की जिम्मेदारी सांसद प्रियंका गांधी को दी है।

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कांग्रेस की रणनीति को झटका

पिछले साल मई में गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। साथ ही प्रियंका गांधी को चुनावी जिम्मेदारी देकर यह संकेत दिया गया था कि कांग्रेस राज्य में बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए गंभीर है। लेकिन अब यही फैसला पार्टी के भीतर असंतोष की वजह बनता दिख रहा है।

बताया जा रहा है कि असम में पार्टी के अंदर गौरव गोगोई का विरोध हो रहा है। कई नेता ने उन पर उम्मीदवार चयन और कैंपेन प्रबंधन में “एकतरफा निर्णय” लेने का आरोप लगा रहे हैं।

प्रियंका के सामने क्या है चुनौती?

असम का यह संकट कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के लिए चुनौती बन गया है। प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने के बाद कई बड़े नेता लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। हालांकि प्रियंका का इससे पहले भी चुनावी प्रबंधन में रिकॉर्ड कमजोर रहा है।

2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीती थी, जबकि 2022 विधानसभा चुनाव में भी पार्टी महज दो सीटों पर सिमट गई। अब असम में भी पार्टी के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बोरदोलोई के इस्तीफे से लगा झटका

प्रद्युत बोरदोलोई की पार्टी को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। वे नगांव से दो बार सांसद और पूर्व में मंत्री रह चुके हैं। पार्टी के कद्दावर नेताओं में उनकी गिनती होती थी। बताया जा रहा है कि टिकट बांटने और नेतृत्व को लेकर उनकी नाराजगी लंबे समय से थी।

उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लिखित पत्र में आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन के दौरान उन्हें अपमानित किया गया और उनकी गलतियों को नजरअंदाज किया गया।

चुनाव से पहले मुश्किलें बढ़ाएं

अब स्थिति यह है कि पार्टी के अभियान समिति के प्रमुख और घोषणापत्र पत्र समिति के अध्यक्ष दोनों ही अब बीजेपी में जा चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति और भरोसेमंद दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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Updated on:
19 Mar 2026 10:06 am
Published on:
19 Mar 2026 10:04 am
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