
BJP-JDU Alliance Update: पिछले दिनों जदयू विधायक सरयू राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुला समर्थन देने की बात कही थी। तब उन्होंने बताया था कि बिना कांग्रेस और बीजेपी के समर्थन से भी कैसे हेमंत सरकार चलेगी।
दरअसल, झारखंड में बहुमत के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में सरयू राय ने बताया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34 विधायक हैं। राष्ट्रीय जनता दल के 4 और भाकपा-माले के 2 विधायक पहले से सरकार के साथ हैं। अगर कांग्रेस के 16 विधायक समर्थन वापस भी ले लें तब भी JMM, RJD और माले को मिलाकर 40 विधायक सरकार के पक्ष में रहेंगे। जदयू भी सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने भी समर्थन का भरोसा दिया है। ऐसे में सरकार के पक्ष में विधायकों की संख्या 42 तक पहुंच सकती है, जो बहुमत के आंकड़े 41 से ज्यादा है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो हेमंत सोरेन अन्य विधायकों से भी समर्थन हासिल कर सकते हैं। ऐसे में सरकार के बहुमत में बने रहने को लेकर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं दिखता। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिना कांग्रेस और बीजेपी के समर्थन से भी सरकार चला सकते हैं।
बता दें झारखंड में भारतीय जनता पार्टी के 21 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं।
सरयू राय के समर्थन देने वाली बात के बाद एनडीए के सहयोगी दल भाजपा और जदयू के रिश्तों को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। क्या दोनों के रिश्तों में खटास बढ़ेगी?
इसी मुद्दे पर जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर जवाब देने से परहेज किया और कांग्रेस पर निशाना साध दिया।
निशिकांत दुबे ने कहा- "अगर कांग्रेस में थोड़ी हिम्मत है तो उसे अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए। उन्हें सिर्फ पैसे चाहिए। हमारे विधायक कुछ और कह रहे हैं। कांग्रेस प्रभारी के. राजू पैसे के लिए बिक गए हैं।" हालांकि, निशिकांत दुबे ने जदयू द्वारा हेमंत सोरेन को दिए गए समर्थन या भाजपा-जदयू संबंधों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। ऐसे में झारखंड में जदयू का यह रुख बिहार की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। भाजपा और जदयू लंबे समय से गठबंधन में हैं। यदि झारखंड में दोनों दलों के राजनीतिक हित अलग-अलग दिशा में जाते हैं तो इसका असर NDA की एकजुटता पर पड़ सकता है।