Ravneet Singh Bittu Rajya Sabha Ticket: बीजेपी की राज्य सभा उम्मीदवारों की सूची में रवनीत सिंह बिट्टू का नाम नहीं होने से पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बिट्टू और नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के जरिए सिख समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

Rajya Sabha Polls: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले बीजेपी ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। बीजेपी ने गुरुवार को राज्य सभा चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की थी, इसमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम शामिल नहीं था। बिट्टू फिलहाल राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं। हालांकि इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि बिट्टू को एक बार फिर से पार्टी राज्य सभा भेज सकती हैं।
वहीं एक और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। ऐसे में अब कयास लगाया जा रहा है कि बिट्टूू और जॉर्ज कुरियन की मोदी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है। दरअसल, इस महीने मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही है।
बता दें कि मोदी सरकार के कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अटकलें लगाई जा रही है। बीजेपी ने पंजाब के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्य सभा प्रत्याशी बनाया हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि बिट्टू की कैबिनेट से भी छुट्टी हो सकती है।
इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तरुण चुघ को राज्य सभा प्रत्याशी घोषित करने को पार्टी के संगठनात्मक समीकरणों और राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं यह भी कयास लगाया जा रहा है कि बिट्टू को बीजेपी अन्य राज्य से राज्य सभा भेज सकती हैं। हालांकि अभी तक इसको लेकर पार्टी की तरफ से कोई सूचना जारी नहीं की गई है।
राज्य सभा का टिकट नहीं मिलने के बाद पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा में रवनीत बिट्टू सक्रिय हो सकते हैं। क्योंकि पंजाब में बीजेपी का जनाधार कमजोर है। ऐसे में बिट्टू को उतारकर पार्टी संगठन को मजबूत कर सकती है।
वहीं पंजाब के तरुण चुघ को राज्य सभा भेजना और बिट्टू का टिकट काटने के पार्टी के फैसले से संकेत मिलते हैं कि पंजाब में BJP नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाने की तैयारी में जुट गई है।
बता दें कि बीजेपी ने हाल ही में पंजाब में अपना प्रदेश अध्यक्ष बदला है। पार्टी ने सिख चेहरे को प्राथमिकता देते हुए केवल सिंह ढिल्लो को नया प्रदेश अध्यक्ष चुना है। प्रदेश में बीजेपी सिख समुदाय को अपनी तरफ करने के लिए बिट्टू और ढिल्लो के जरिए नए समीकरण बना सकती है।
केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का पहला प्रमुख जाट सिख प्रदेश अध्यक्ष बनाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी शहरी हिंदू वोटों के साथ ग्रामीण सिख समाज में भी पैठ बनाना चाहती है।
रवनीत बिट्टू और केवल सिंह ढिल्लों, दोनों का प्रभाव मालवा बेल्ट में माना जाता है, जो पंजाब की राजनीति का सबसे निर्णायक इलाका है। पार्टी इन्हें मिलाकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक वोटों में सेंध लगाने की रणनीति अपना सकती है।