
नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को लेकर घमासान छिड़ गया है। दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अपने 11 साल के शासनकाल में व्यापक भ्रष्टाचार करने का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को अपने कार्यकाल में हुए एक-एक रुपए के भ्रष्टाचार का हिसाब जनता को देना होगा।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि कैग की यह रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार में कभी ऑडिट नहीं होता था। हमारी सरकार के महज 18 महीने के कार्यकाल में 24 कैग रिपोर्ट आ चुकी हैं।
प्रवेश साहिब सिंह ने 7 अगस्त को विधानसभा में पेश 31 मार्च 2023 तक की कैग रिपोर्ट है, जिसमें 3500 करोड़ रुपए की अनियमितताएं सामने आई है। उन्होंने कहा कि दो दिन पूर्व सामने आई कैग की रिपोर्ट के बाद हम कह सकते है कि केजरीवाल ने नियमों को दरकिनार कर 1,185 मैनुअल टेंडर जारी किए और टेंडरों में आर्बिट्रेशन क्लॉज डालकर बड़े पैमाने पर घोटाले किए। रिपोर्ट के अनुसार के दिल्ली की जनता का लगभग 70,410 करोड़ रुपए का कुछ व्यापारियों पर बकाया था और यह राशि पांच साल से ज्यादा समय से दिल्ली की सरकार वसूल नहीं कर रही थी। यानि जिन उद्योगपतियों को पैसा देना होता था, उनसे राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग सांठगांठ करके उसे बकाया डाल देता था। साथ ही 8,334 कारोबारी ऐसे थे, जिनका जीएसटी पंजीकरण ही रद्द कर दिया गिया लेकिन वह लगातार ई-बिल बनाते रहे।
31 मार्च 2023 तक की यह कैग की रिपोर्ट बताती है की 68,680 करोड़ रुपए के बोगस ई-वे-बिल बनाए गए। इसके अलावा 4,076 नॉन फाइलर्स ने लगातार 11,635 करोड़ रुपए के ई-वे-बिल जेनरेट किए। 6.10 करोड़ ई-वे-बिल में से केवल 0.10 प्रतिशत की ही जांच की गई। 70 मामलों की जांच में 3,071.92 करोड़ रुपए के राजस्व प्रभाव वाले 344 गैर-अनुपालन मामले और 3,710.17 करोड़ रुपए का टर्नओवर मिसमैच सामने आया।
मंत्री ने बिजली सब्सिडी योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन 50 हजार उपभोक्ताओं का 12 महीनों तक शून्य बिल था, उन्हें भी 17.81 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई। इसके अलावा, 6 से 11 महीने तक घर पर मौजूद न रहने वाले 90 हजार उपभोक्ताओं के नाम पर 11.88 करोड़ रुपए जारी किए गए। ऊर्जा सब्सिडी के नाम पर कुल 42 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने यह भी उजागर किया कि 1998 से पूर्व भाजपा सरकार द्वारा बापरोला में इंडस्ट्रियल पार्क के लिए अधिग्रहित जमीन पर 28 वर्षों में कोई काम नहीं हुआ, जिससे 29.45 करोड़ रुपए का निष्फल व्यय और 15.79 करोड़ रुपए का ग्राउंड रेंट बकाया हो गया। ऑनलाइन टेंडर अनिवार्य होने के बावजूद 1,185 मैनुअल टेंडर दिए गए। इसमें से 97 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड की फाइलें गायब हैं, जिसकी गहन जांच की जा रही है।