CBSE Third Language Circular: बच्चों के लिए क्या बदला, स्कूल भी क्यों हो रहे कंफ्यूज? जानिए हर सवाल का जवाब
CBSE Third Language Circular: CBSE की नई थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी ने छात्रों, पैरेंट्स और स्कूलों की चिंता बढ़ा दी है। अब 1 जुलाई 2026 से क्लास 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। बोर्ड का कहना है कि इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। हालांकि फॉरेन लैंग्वेज (foreign languages) पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन उन्हें लेकर नई शर्तें लागू कर दी गई हैं।
दरअसल, सीबीएसई ने अप्रैल में जारी अपने करिकुलम में 3-लैंग्वेज फॉर्मूला को फेज्ड मैनर में लागू करने की बात कही थी। तब माना जा रहा था कि इसकी शुरुआत सिर्फ क्लास 6 से होगी और धीरे-धीरे आगे की क्लासेज में इसे लागू किया जाएगा। लेकिन 15 मई को जारी किए नए सर्कुलर में बोर्ड ने अचानक क्लास 9 को भी इस व्यवस्था में शामिल कर लिया। इस वजह से सब इसे लेकर कंफ्यूज हो गए हैं।
CBSE के अनुसार अब Class 9 students को R1, R2 और R3 यानी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। Board का कहना है कि यह फैसला National Education Policy (NEP) 2020 के तहत लिया गया है ताकि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जा सके।
सीबीएसई ने फॉरेन लैंग्वेज पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है। छात्र अभी भी फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, जापानी जैसी फॉरेन लैंग्वेज पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके लिए नई शर्तें लागू की गई हैं। बोर्ड के अनुसार, अगर कोई छात्र फॉरेन लैंग्वेज पढ़ना चाहता है, तो बाकी दो भाषाएं भारतीय होनी जरूरी होंगी। यानी तीन भाषाओं के कॉम्बिनेशन में कम से कम दो “नेटिव इंडियन लैंग्वेज” शामिल होनी चाहिए। अगर यह शर्त पूरी नहीं होती, तो फॉरेन लैंग्वेज को चौथी भाषा, एक्टिविटी या ऑप्शनल सब्जेक्ट की तरह पढ़ाया जा सकता है, वह भी तभी जब स्कूल में इसकी सुविधा उपलब्ध हो।
यही वह पॉइंट है जहां सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है। कई इंग्लिश-मीडियम स्कूलों में बच्चे अभी तक इंग्लिश, हिंदी और फ्रेंच या जर्मन जैसे कॉम्बिनेशन पढ़ रहे थे। अब स्कूल यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ये कॉम्बिनेशन नए नियम में वैलिड माने जाएंगे या नहीं।
बोर्ड ने यह साफ कर दिया है कि तीसरी भाषा का बोर्ड एग्जाम नहीं होगा। इसका असेस्मेंट पूरी तरह स्कूल बेस्ड और इंटरनल रहेगा। हालांकि स्टूडेंट की परफॉरमेंस सीबीएसई सर्टिफिकेट में दिखाई जाएगी।
कई छात्र जो पिछले कई वर्षों से फ्रेंच या जर्मन जैसी फॉरेन लैंग्वेज पढ़ रहे हैं, उन्हें अब संस्कृत, बंगाली, तमिल, तेलुगु, पंजाबी या मराठी जैसी नई इंडियन लैंग्वेज शुरू करनी पड़ सकती है। स्कूलों का कहना है कि सेशन शुरू होने के बाद अचानक ऐसा बदलाव बच्चों पर दबाव बढ़ा सकता है। वहीं स्कूलों को कम समय में टाइमटेबल बदलने, नए टीचर्स की व्यवस्था करने, लैंग्वेज ऑप्शंस तय करने और स्टूडेंट्स के सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन दोबारा तैयार करने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पैरेंट्स का कहना है कि दूसरे राज्यों में रहने वाले बच्चों के लिए नई क्षेत्रीय भाषा सीखना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब पैरेंट्स खुद वह भाषा नहीं जानते हों।