Injectable Cosmetics Regulations 2026: सरकार ने ब्यूटी क्लिनिकों और कॉस्मेटिक इंजेक्शन के इस्तेमाल पर सख्ती करते हुए बड़ा फैसला लिया है। सीडीएससीओ के नए आदेश के मुताबिक अब किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद का इंजेक्शन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
CDSCO Cosmetic Injection Ban: सुंदर दिखने की चाहत अब लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा जोखिम उठाने पर मजबूर कर रही है। ग्लोइंग स्किन, एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट और इंस्टेंट ब्यूटी के नाम पर तेजी से बढ़ रहे इंजेक्शन आधारित कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद का इस्तेमाल इंजेक्शन के रूप में नहीं किया जा सकेगा। यह नियम उपभोक्ताओं, ब्यूटी प्रोफेशनल्स और एस्थेटिक क्लिनिकों सभी पर समान रूप से लागू होगा।
सीडीएससीओ ने अपने आदेश में कहा है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और कॉस्मेटिक्स नियम, 2020 के तहत कॉस्मेटिक उत्पादों का उपयोग केवल बाहरी तौर पर किया जा सकता है।
इन उत्पादों का उद्देश्य त्वचा की सफाई, देखभाल और बाहरी सुंदरता बढ़ाना है, न कि किसी तरह का इलाज या मेडिकल थेरेपी देना। ऐसे में किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद को इंजेक्टेबल रूप में इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए बिना सर्जरी सुंदरता बढ़ाने के दावे तेजी से बढ़े हैं। कई ब्यूटी क्लिनिक और अप्रशिक्षित लोग इंजेक्शन के जरिए चेहरे की बनावट, त्वचा की चमक और उम्र कम दिखाने वाले उपचार देने लगे थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि गलत तरीके से लगाए गए इंजेक्शन से एलर्जी, त्वचा खराब होना, संक्रमण और शरीर के अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सीडीएससीओ ने यह भी साफ किया है कि किसी कॉस्मेटिक उत्पाद के विज्ञापन या लेबल पर भ्रामक दावे करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा।
इसके अलावा निर्माता कंपनियां अपने उत्पादों के उपयोग संबंधी तय निर्देशों में बदलाव भी नहीं कर सकेंगी। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स पहले ही असुरक्षित और प्रतिबंधित कॉस्मेटिक सामग्री की सूची जारी कर चुका है।
ब्यूटी और स्किन केयर उद्योग में इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिसर्च फर्म के अनुसार भारत में फेशियल इंजेक्टेबल्स का बाजार फिलहाल करीब 97.6 मिलियन डॉलर का है।
अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह बाजार 9.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ बढ़कर लगभग 194.30 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
सरकार का मानना है कि इस बढ़ते कारोबार के बीच लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है, इसलिए यह फैसला लिया गया है।